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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 11

सूचीपत्र । ६
पृष्ठ
४ उसके काका और चचेरे भाइयों की वीरता का वर्णन ॥ ... ... ... ... ”
५ पाट बैठने पर प्रतापसी को गर्व होना ॥ ... ... ... ... २८३
६ प्रतापसी के देश उजाड़ने की पुकार भीमंग के पास होना ॥ ... ... ... ... ”
७ भोरा भीम की उनसे लड़ाई ॥ ... ... ... ... ... ”
८ उन सातों भाइयों का चलचित्त होना ॥ ... ... ... ... ... २८५
६ पृथ्वीराज का उन चलचित्त सातों भाइयों को जागीर और सिरोपाय देना ॥ ... ... ”
१० पृथ्वीराज का दर्वार करके बैठना उसमें प्रतापसी का आना और उसे मूँछ मरोड़ने पर कन्ह का
मारना ॥ ... ... ... ... ... ... ”
०१ भाई के मारे जाने पर अरिसिंह का क्रोध करना और कन्ह चौहान पर वार करना ॥ ... २८६
१२ पृथ्वीराज का महल में जाना और अरि सिंहादि की लड़ाई का होना ॥ ... ... २८७
१३ सूरसिंह का युद्ध ॥ ... ... ... ... ... ... २८८
१४ नरसिंह का युद्ध ॥ ... ... ... ... ... ... ”
१५ कैमास का युद्ध ॥ ... ... ... ... ... ... ”
१६ माधव खवास का युद्ध ॥ ... ... ... ... ... २८६
१७ कन्ह का युद्ध ॥ ... ... ... ... ... ... ”
१८ चालुक्यों के मारे जाने से दर्बार में कोलाहल होना ॥ ... ... ... ... २६०
१६ सांझ हो गई परन्तु लड़ाई न रुकी ॥ ... ... ... ... ... २६१
२० कन्ह चौहान का युद्ध जीतना ॥ ... ... ... ... ... ”
२१ प्रतापसिंह आदि के मारे जाने का समाचार सुनकर पृथ्वीराज का अप्रसन्न होना ॥ ... २६४
२२ पृथ्वीराज की अप्रसन्नता सुनकर कन्ह चौहान का घर बैठ रहना तीन दिन तक अजमेर में हड़ताल
पड़ना ॥ ... ... ... ... ... ... ”
२३ सात दिन तक कन्ह के न आने पर पृथ्वीराज का उनके घर मनाने को जाना और कहना कि
संसार में यह बुराई हुई कि घर बुलाकर चालुक्यों को मार डाला ॥ ... ... २६५
२४ कन्ह का कहना कि मेरे सामने दूसरा कौन सभा में बैठकर मोछ पर ताव रख सकता है ॥ ... ”
२५ पृथ्वीराज का कहना कि तो आप आंख में पट्टी बांधे रहा कीजिए ॥ ... ... ”
२६ पृथ्वीराज का जड़ाऊ पट्टी बनवाकर अपने हाथ से कन्ह के आंख में बांध देना ॥ ... ”
२७ पट्टी रात दिन बँधी रहती थी ॥ ... ... ... ... ... २६६
२८ कन्ह चौहान की प्रशंसा ॥ ... ... ... ... ... २६७
२६ चालुक्य राजा भीम का अपने भाइयों के मारे जाने का समाचार सुन कर बहुत दुखी होना ॥ ... ”
३० भीम का पृथ्वीराज से भाइयों के पलटे में लड़ाई मांगना ॥ ... ... ... ”
३१ पृथ्वीराज का उत्तर देना कि हम तयार हैं जब चाहे आओ ॥ ... ... ... २६८
३२ भीम का चढ़ाई के लिये तयार होना पर सरदारों के कहने से वर्षा ऋतु भर ठहर जाना ॥ ... ”
३३ - उपसंहार का कथन ॥ ... ... ... ... ... ”
[ ६ ] आखेटक वीर बरदान वर्णन समय ।
( पृष्ठ २६६ से पृष्ठ ३२८ तक )
१ पृथ्वीराज के कुंअरपने के तपतेज का वर्णन ॥ ... ... ... ... २६६
२ - पृथ्वीराज की दिनचर्या का वर्णन ॥ ... ... ... ... ... ३००
३ पृथ्वीराज का आखेट के लिये निकलना ॥ ... ... ... ... ... ३०१
४ अकेले कवि चंद का वन में भूल जाना ॥ ... ... ... ... ... ”
५ एक आम के पेड़ के नीचे एक ऋषि से उसकी भेंट होना ॥ ... ... ... ”
६ कवि चंद का ऋषि के पास जाकर पूछना कि आप कौन हैं ॥ ... ... ... ३०२
७ ऋषि का पूछना कि तुम कौन हो, इस बीहड़ वन में कैसे आए ॥ ... ... ... ”
८ चंद का अपना परिचय देना ॥ ... ... ... ... ... ”
६ जती का प्रसन्न होकर एक मंत्र बतलाना जिसके वश में बावन वीर हैं ॥ ... ... ३०३