प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रतिमा-नाटकम्
नाटक का नामकरण
प्रतिमा नाटक भास का एक महत्वपूर्ण नाटक है । रामायण की
कथावस्तु वाले इस रूपक मे प्रतिमा गृह अथवा मूर्ति गृह की घटना का
महत्व ही इस नाटक की इतिवृत्त रचना की प्रमुख विशेषता है । इस प्रकार
इसका नाम तीसरे अंक के 'प्रतिमा गृह' की घटना के आधार पर रखा
गया है । प्राचीन काल मे राजाओ के देवकुल होते थे, जिनमे मृत्यु के बाद
राजाओ की पत्थर की मूर्तिया स्थापित की जाती थी । इक्ष्वाकु वंश का
भी ऐसा ही देवकुल था, जिसमे मृत नरेशो की मूर्तिया स्थापित की गई थी ।
ननिहाल से लौटने समय देवकुल मे स्थापित दशरथ की प्रतिमा को देख कर
ही भरत ने उनकी मृत्यु का अनुमान अपने आप कर लिया था । इसी कारण
से इसका नाम "प्रतिमा नाटक" पड़ा । प्रो० ध्रुव के अनुसार इस नाटक
का पूरा नाम 'प्रतिमा दशरथ' रहा होगा, जिसे संक्षिप्त रूप मे 'प्रतिमा'
कर दिया गया । भास के एक अन्य नाटक 'प्रतिज्ञा यौगन्धरायण' को संक्षेप
मे 'प्रतिज्ञा नाटक' तथा 'स्वप्नवासवदत्तम्' को 'स्वप्न नाटक' भी कहा जाता
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