सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 296 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 17

( 14 )
इनमें व्यर्थ का विसंवाद कहीं भी प्राप्त नहीं होता है। संक्षिप्त शब्दों में
मनोगत भावों को प्रकट करना भास की विशेषता है। कौन पात्र किस परि-
स्थिति में किस प्रकार की भावदशा के अधीन रहेगा, इसका चित्रण भास ने
कुशलतापूर्वक किया है। वाग्विस्तार का परिहार इनकी प्रमुख विशेषता है।
वार्तालापों के आश्रय से ही सारे दृश्य उपस्थित हो गए हैं। पृथक्-पृथक् अवस्था
में विभिन्न भावों और विषयों के सूक्ष्म वर्णन में भास सिद्धहस्त हैं।
वर्णन का सूक्ष्म व स्पष्ट होना—वर्णन की सूक्ष्मता भी भास का शैलीगत
वैशिष्ट्य है। विषय या दृश्य का वर्णन करते समय उसके सूक्ष्मातिसूक्ष्म अंश
को भी वे उपस्थित कर देते हैं। दरिद्र चारुदत्त में दरिद्रता का वर्णन स्वाभा-
विक होने के साथ सूक्ष्म भी है। भास की शैली में संक्षिप्तता के साथ स्पष्टता
गुण भी निहित है। वे दृश्य वर्णन प्रसंग में इतने स्पष्ट रहते हैं, जिससे पाठक
या दर्शक बिम्ब ग्रहण करने में समर्थ होता है। यही कारण है कि भास को
संध्यावर्णन, मध्यरात्रि वर्णन, वनवर्णन, मध्याह्न वर्णन, तारुण्य वर्णन आदि