प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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(अ) बलशाली की उपमा सिंह से तथा दुर्बल की मृग से दी है ।
(ब) वीर व्यक्ति का सबसे अच्छा अस्त्र उसका हाथ बताया गया है ।
(स) नारद को "कलह प्रिय" कहा है ।
(द) शाप तथा शपथ का वर्णन इन सभी नाटको मे समान रूप से
पाया जाता है ।
(क) भास ने अपने रूपको मे जीवन की विविधता और वैषम्य का
चित्रण किया है, जिससे अश्रुसिक्त अवस्था का वर्णन भी अनेक स्थलो पर
आया है ।
(ख) समान भावों का प्रयोग—जैसे दयनीय दृश्यो का वर्णन समान
रूप से उपलब्ध है । ब्रह्मचारी पात्र के प्रवेश से नाटकीय कौतूहल को सजग
बनाने का प्रयास प्रायः कई नाटको में पाया जाता है । परिव्राजक या तापस
इसी का परिवर्तित रूप है ।
(ग) पिता को कन्या के विवाह की चिन्ता, अमात्य का दायित्व,
अपराध निरीक्षण एव कला संबधी प्रेम ऐसे भाव है, जिनकी आवृत्ति विभिन्न
प्रसंगों मे प्रायः कई नाटकों में पाई जाती है ।
(घ)