प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयोऽध्यायः ५६
अपराजित पृच्छा सूत्र १२६ में कहा है कि—
"उदुम्बरं तथा वक्ष्ये कुम्भिकान्तं तदुच्छ्रयम् ।
तस्यार्धेन त्रिभागेन, पादोनरहितं तथा ॥
उक्तं चतुर्विधं शस्तं कुर्याच्चैवमुदुम्बरम् ।
अत्युत्तमाश्च चत्वारो न्यूना द्व्यास्तथाधिका ॥
खुरकोर्ध्वेद्वं चन्द्रः स्यात् तदूर्ध्वं स्यादुदुम्बरः ।
उदुम्बराद्धे त्र्यंशे वा पादे वा गर्भभूमिका ॥
मण्डपेषु च सर्वेषु पीठान्ते रङ्गभूमिका ।।"
उमाशंकर ओ० शिल्पीशास्त्री
हस्तिनी सधैशाख्या विस्तार भाग ८ | उदुम्बर भाग ३ | हस्तिनी सधैशाख्या विस्तार भाग ८
ग्रास १ | मंदारक २ | ग्रास १
सिंहशाखा | रूपशाखा | पेद्यशाखा २ भाग ओळख | गंधर्वशाखा | पेद्यशाखा | पेद्यशाखा | गंधर्वशाखा | पेद्यशाखा २ भाग ओळख | रूपशाखा | पेद्यशाखा | सिंहशाखा
मंदिर के द्वार की देहजो का उद्भव आर तल भाग तथा अर्द्ध चंद्र ओर गगारक.