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प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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अपनी शक्ति के अनुसार लकडी, मिट्टी, ईंट, पाषाण, धातु अथवा रत्न, इन पदार्थों मे से किसी भी
एक पदार्थ का देवालय बनावें तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
'कोटिघ्नं तृणजे पुण्यं मृण्मये दशसङ्गु णम् ।
ऐष्टके शतकोटिघ्नं शैलेऽनन्त फल स्मृतम् ॥' अ० १ श्लो० ३५
देवालय घासका बनावें तो करोड गुना, माटीका बनावें तो दस करोड गुना, ईंट का बनावें तो
सौ करोड गुना और पाषाणका बनावें तो अनन्त-गुना फल मिलता है ।
वास्तुशिल्प के आठ सूत्र-
वास्तु शिल्प के इमारती काम करने के लिये शिल्पीओ के पास मुख्य आठ सूत्र पाये जाते है । उनमे
प्रथम दृष्टिसूत्र, दूसरा हस्त ( गज ) सूत्र, तीसरा मुंज की रस्सी, चौथा सूत का डोरा, पाचवां अवलव,
छट्ठा काट कोना, सातवा साधणी ( रेवल ) और आठवा प्रकार है । इसका परिचय के लिये देखिये नीचे का
रेखा चित्र ।
इनमे जो भूमि आदि वस्तुओ का नाप करने के लिये दूसरा हस्तसूत्र है, यह तीन प्रकार के माप का
है । उसको जानने के लिये माप की तालीका इस प्रकार है-
८ परमाणु = १ केशाग्र, ११ अंगुल = १ गोकर्ण
८ केशाग्र = १ लीक्षा ( लीख ) १२ ,, = १ बिलाद, ताल, वित्ता,
८ लीक्षा = १ जू, १४ ,, = १ उद्दिष्ट, पाद,
८ जू = १ यवोदर, २१ ,, = १ रत्नि,
८ यवोदर = १ अंगुल, मात्रा, २४ ,, = १ अरत्नि, हाथ, दो फुट का गज,
२ अंगुल = १ कला, गोलक, ४२ अंगुल = १ किष्कु,
३ ,, = १ पर्व, ८४ ,, = १ व्याम, पुरुष,
४ ,, = १ मुष्टि, मूठी, ९६ ,, = १ धनुष, नाडीयुग,
५ ,, = १ तल, १०६ ,, = १ दंड,
६ ,, = १ करपार्श्वांगुल, ३० धनुष = १ नल्य,
७ ,, = १ दिष्टी, १००० ,, = १ कोस
८ ,, = १ तुणी, २ कोस = १ गव्यूत
९ ,, = १ प्रादेश ४ गव्यूत = १ योजन,
१० ,, = १ शयताल
उपरोक्त जो आठ यवोदरका एक अगुल माप लीखा है, यह तीन प्रकार का माना जाता है । जैसे-
आठ यवोदर का एक अंगुल यह ज्येष्ठ माप का, सात यवोदर का एक अगुल यह मध्यम माप का और छह
यवोदर का एक अगुल यह कनिष्ठ मानका अंगुल माना जाता है । इन तीन प्रकार के अंगुलो मे से जिस
२४ अगुल के नाप का हाथ बनाया. जाय तो यह हाथ भी ज्येष्ठ, मध्यम और कनिष्ठ मानका होता है ।
जैसे-आठ यवोदर का एक अगुल, ऐसे २४ अगुल का एक ज्येष्ठ हाथ, सात यवोदर का एक अगुल, ऐसे