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सर्वकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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पृष्ठ 228

परिशिष्टे केसरीप्रासादः १७६
शोभायमान बनावे । यह वैडूर्य नाम का प्रासाद सब देवो के लिये बनाना चाहिये ॥४६॥
शृंगसख्या—कोने १२, प्रत्यंग ८, प्रतिरथे २४, भद्रनंदी पर ८, भद्रे १६ एक शिखर,
एवं कुल ६९ शृंग । तिलक संख्या—कर्णनंदी पर १६, प्रतिरथ नदी पर १६ और भद्रनन्दी
पर ८, एवं कुल ४० तिलक ।
१८-पद्मरागप्रासाद--
तथैव तिलकं नन्द्यां शृङ्गयुग्मं तु संस्थितम् ।
पद्मरागस्तदा नाम सर्वदेवसुखावहः ॥४७॥
इति पद्मरागप्रासादः ॥१८॥
इस प्रासाद का मान और स्वरूप वैडूर्यप्रासाद की तरह समझे । विशेष यह है कि-
कोणे के ऊपर से तीसरा शृंग हटा करके उसके बदले मे तिलक चढ़ावे और भद्रनंदी के
ऊपर जो एक तिलक और एक शृंग है, उसके बदले दो शृंग रक्खे । ऐसा पद्मराग नाम का
प्रासाद सब देवो के लिये सुख कारक है ॥४७॥
शृंगसख्या—कोणे ८, प्रत्यंग ८, प्रतिरथे २४, भद्र नंदी पर १६, भद्रे १६, एक शिखर,
एवं कुल ७३ शृंग । तिलक संख्या—कोणे ४, कर्णनन्दी पर १६ प्रतिरथ नदी पर १६
एवं कुल ३६ तिलक ।
१९-वज्रकप्रासाद--
रेखोर्ध्वे च ततः शृंगं कर्त्तव्यं सर्वशोभनम् ।
वज्रकश्चेति नामासौ शक्रादिसुरवल्लभः ॥४८॥
इति वज्रकप्रासादः ॥१९॥
इस प्रासाद का मान और स्वरूप पद्मराग प्रासाद की तरह जानें । विशेष यह है कि-
कोणे के ऊपर से तिलक हटा करके उसके बदले में शृंग चढ़ावे । यह वज्रक प्रासाद इन्द्र आदि
देवो को प्रिय है ॥४८॥
शृंगसख्या—कोणे १२, प्रत्यंग ८, प्रतिरथे २४, भद्रनंदी पर १६, भद्रे १६, एक शिखर,
कुल ७७ शृंग । तिलक सख्या—कर्णनंदी पर १६, प्रतिरथ नन्दी पर १६, कुल ३२ तिलक ।
२०-मुकुटोज्ज्वलप्रासाद--
भक्ते त्रिंशतिधा क्षेत्रे द्विभागः कर्णविस्तरः ।
सार्धभागं भवेन्नन्दी कर्णवत्प्ररथस्तथा ॥४६॥