प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
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Plate XIV. लिपिपत्र १४वां.
कोणडमुडि से मिले हुए राजा जयवर्मन् के दानपत्र से.
(ई. स. की चौथी शताब्दी के प्रारंभ के आसपास.)
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ट ट ठ ड ड ढ त त थ द ध ध न न न
प प प फ ब भ म य र ल व व व श ष स
स ह ह जा पा च्छि गु यु रू टू बृ के तो न्हु म्ह्ने द्य
[सि]धं विजयखंधावारा कोदूरतो गो[त]मपुतस
[सि]रिजयवम्मस्स वचनेन कुदुरे वा[पतो]
आनपयति अम्हेहि इध अपणो आयुबल
वद्धनिके वानेय्यस गोतस बह्मणेस्स
तायनम्हि गामे पांटूर [ए]को भ[ागो]
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