प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)
Prabandha Chintamani with Hindi Translation
मेरुतुङ्गाचार्य (१३०४ ई.) / पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रबन्धचिन्तामणिकी संकलना ।
इस ग्रन्थका संकलन और प्रकाशन निम्न प्रकारसे, ५ भागोंमें, पूर्ण होगा।
(१) प्रथम भाग-
भिन्न भिन्न प्रतियोंके आधारपर संशोधित - विविध पाठान्तर समवेत - मूल ग्रन्थ; १
परिशिष्ट; मूलग्रन्थ और परिशिष्टमें आये हुये संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषामय पद्योंकी
अकारादिक्रमानुसार सूचि; पाठ संशोधनके लिये काममें लाई गई पुरातन प्रतियोंका सचित्र
वर्णन । ( छप गया )
(२) द्वितीय भाग-
प्रबन्धचिन्तामणिगत प्रबन्धोंके साथ सम्बन्ध और समानता रखनेवाले अनेकानेक
पुरातन प्रबन्धोंका संग्रह; पद्यानुक्रमसूचि; विशेषनामानुक्रम; विस्तृत प्रस्तावना और प्रबन्ध
संग्रहोंकी मूल प्रतियोंका सचित्र परिचय । (छप गया )
(३) तृतीय भाग-
प्रबन्ध चिन्तामणिके मूल संस्कृतका शुद्ध और सरल संपूर्ण हिन्दी भाषान्तर, विशिष्ट
प्रास्ताविक वक्तव्यके साथ । ( प्रस्तुत ग्रन्थ )
(४) चतुर्थ भाग-
पुरातन-प्रबन्ध-संग्रह नामक द्वितीय भागका संपूर्ण हिन्दी भाषान्तर । ( छप रहा है )
(५) पञ्चम भाग - दो विभागोंमें
(१) पहले विभागमें - शिलालेख, ताम्रपत्र, पुस्तक प्रशस्ति आदि जितने समकालीन
साधन और ऐतिह्य प्रमाण उपलब्ध होते हैं उनका एकत्र संग्रह और रूपरिचायक उपयुक्त
विस्तृत विवेचन; प्राक्कालीन और पश्चात्कालीन अन्यान्य ग्रन्थोंमें उपलब्ध प्रमाणभूत प्रकरणों,
उल्लेखों और अवतरणोंका संग्रह; कुछ शिलालेख, ताम्रपत्र और प्राचीन ताडपत्रोंके
चित्र - इत्यादि ।
(२) दूसरे विभागमें - प्रबन्धचिन्तामणिग्रथित सब विषयोंका विवेचन करनेवाली
विस्तृत प्रस्तावना - जिसमें तत्कालीन ऐतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक, धार्मिक और
राजकीय परिस्थितिका सविशेष ऊहापोह और सिंहावलोकन किया जायगा । साथमें प्राचीन
मन्दिर, मूर्तियां, पोथियां इत्यादिके अनेक चित्र भी दिये जायँगे ।