प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)
Prabandha Chintamani with Hindi Translation
मेरुतुङ्गाचार्य (१३०४ ई.) / पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा
DevanagariHindipublished181 पृष्ठ
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प्रबन्धचिन्तामणि विषयानुक्रम
( ७ ) मंत्रीका मुसलमान सुलतानके साथ मैत्रीका सम्बन्ध बान्धना .... १२७
( ८ ) अनुपमाकी दानशीलता .... .... .... .... १२८
( ९ ) वीरधवलकी रणशूरता .... .... .... .... ,,
( १० ) वीरधवलकी मृत्यु .... .... .... .... १२९
( ११ ) अनुपमाकी मृत्यु .... .... .... .... ,,
( १२ ) वस्तुपालकी मृत्यु .... .... .... .... ,,
- पञ्चम प्रकाश -
११ प्रकीर्णक प्रबन्ध .... .... , .... .... १३१-१५२
( १ ) विक्रमादित्यकी पात्र परीक्षा .... .... .... .... १३१
( २ ) मरे हुए नन्दका पुनर्जीवन .... .... .... .... ,,
( ३ ) राजा शिलादित्य और मल्लवादी सूरिका प्रबन्ध .... .... १३२
( ४ ) बौद्ध और जैनोंमें वाद-विवाद .... .... .... ,,
( ५ ) वलभी नगरीके विनाशकी कथा .... .... .... १३३
( ६ ) श्री पुंजराजकी उत्पत्ति .... .... .... .... १३४
( ७ ) श्रीमाताकी उत्पत्तिका वर्णन .... .... .... १३५
( ८ ) चोड देशके गोवर्धन राजाकी न्यायप्रियताका उदाहरण .... १३६
( ९ ) पुण्यसार राजाका वृत्तान्त .... .... .... .... १३७
( १० ) कर्मसार राजाका प्रबन्ध .... .... .... .... ,,
( ११ ) राजा लक्ष्मणसेन और उमापतिधरका प्रबन्ध .... .... १३८
( १२ ) काशीके जयचन्द्र राजाका प्रबन्ध .... .... .... १३९
( १३ ) जगदेव क्षत्रियका प्रबन्ध .... .... .... १४१
( १४ ) पृथ्वीराजके तुंग सुभटका प्रबन्ध .... .... .... १४३
( १५ ) पृथ्वीराजका म्लेच्छोंके हाथ मारा जाना .... .... १४४
( १६ ) कौंकण देशकी उत्पत्ति कैसे हुई .... .... .... १४५
( १७ ) ज्योतिषी वराहमिहिरका प्रबन्ध .... .... .... ,,
( १८ ) सिद्धयोगी नागार्जुनका वृत्तान्त .... .... .... १४७
( १९ ) स्तंभनक पार्श्वनाथका प्रादुर्भाव .... .... .... १४८
( २० ) कवि भर्तृहरिकी उत्पत्तिका वर्णन .... .... .... ,,
( २१ ) वाग्भट वैद्यका प्रबन्ध .... .... .... .... १४९
( २२ ) गिरनार तीर्थके निमित्त श्वेताम्बर-दिगम्बरमें लड़ाई .... .... १५०
( २३ ) सोमेश्वरका अपने भक्तोंकी परीक्षा करना .... .... १५१
( २४ ) पूर्वजन्मका किया भोगना .... .... .... ,,
( २५ ) जिन पूजाका माहात्म्य .... .... .... १५२ - ग्रन्थकारकी प्रशस्ति .... .... .... १५३
परिशिष्ट-कुमारपालका अहिंसाके साथ पाणिग्रहणका रूपकात्मक प्रबन्ध १५३-१५६