प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)
Prabandhachintamani of Acharya Merutunga
आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रबन्धचिन्तामणि विषयानुक्रम
(२२) झालासामन्त भांगूकी शूरताका वर्णन .... .... .... ८६
(२३) सिद्धराजकी सभामें म्लेच्छराजके दूतोंका आगमन .... .... ८७
(२४) सिद्धराजका कोल्हापुरके राजाको चमत्कारके भ्रममें डालना .... "
(२५) कौतुकी सींलणकी वाक्चातुरी .... .... .... "
(२६) काशीराज जयचन्द्रकी सभामें सिद्धराजके दूतकी वाक्पटुता .... ८८
(२७) मयणल्लादेवीके पिताकी मृत्युवार्त्ता .... .... .... "
(२८) पिताके पुण्यार्थ मयणल्लादेवीका सोमेश्वरकी यात्रा करना .... ८९
(२९) सान्तू मंत्रीकी बुद्धिमत्ताका एक प्रसंग .... .... .... "
(३०) सिद्धराजके एक सेवकके भाग्यका वृत्तान्त .... .... .... "
(३१) सिद्धराजकी स्तुतिके कुछ फुटकर पद्य .... .... .... ९०
— चतुर्थ प्रकाश —
९ कुमारपालादि प्रबन्ध .... .... .... ९३–१२१
(१) कुमारपालके पूर्वजादि .... ... .... .... ९३
(२) सिद्धराजके भयसे कुमारपालका मारे मारे फिरना .... .... ९४
(३) कुमारपालका राजगद्दीपर बैठना .... .... .... ९५
(४) कुमारपालने राजद्रोहियोंका उच्छेद किया .... .... .... "
(५) कुमारपालका चाहमान राजा आनाकके साथ युद्ध,.... ... "
(६) कुमारपालका उपकारियोंको सकृत करना .... .... ९६
(७) गायक सोलाककी कलाप्रवीणता .... .... .... ९७
(८) कोंकणके राज! मल्लिकाजुनका मंत्री आंबड द्वारा उच्छेद .... "
(९) कुमारपालके साथ हेमचन्द्राचार्यके समागमका प्रसंग .... ९८
(१०) हेमाचार्यके समागमसे कुमारपालके पुरोहितका विद्वेष .... ९९
(११) कुमारपालका सोमेश्वर तीर्थके जीर्णोद्धारका प्रारंभ करवाना १००
(१२) ,, उदयनमंत्रीसे हेमाचार्यका जीवनवृत्तान्त पूछना .... १०१
(१३) ,, सोमेश्वरके उद्धारकी समाप्तिके निमित्त नियम लेना १०२
(१४) हेमचन्द्राचार्यका सोमेश्वरकी यात्रानिमित्त कुमारपालके साथ जाना "
(१५) हेमाचार्यका शिवकी स्तुति-पूजा करना .... .... "
(१६) कुमारपालकी तत्त्वजिज्ञासा और हेमाचार्यका शिवको प्रत्यक्ष करना १०३
(१७) कुमारपालका परमार्हत श्रावक बनना .... .... १०४
(१८) मंत्री उदयनका सौराष्ट्रके युद्धमें मारा जाना .... .... "
(१९) मंत्री बाहडका शत्रुंजयतीर्थोद्धार करवाना .... ... १०५
(२०) मंत्री आम्रभटका शकुनिकाविहारका उद्धार करवाना .... १०६
(२१) आम्रभटका शाकिनीग्रस्त होना .... .... .... "