प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)
Prabandhachintamani of Acharya Merutunga
आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रबन्धचिन्तामणि विषयानुक्रम
प्रास्ताविक वक्तव्य .... .... .... .... .... पृ. क-ठ
— प्रथम प्रकाश —
प्रारम्भिक मंगलादि कथन .... .... .... ... १-२
१ विक्रमार्क राजाका प्रबन्ध .... .... .... .... ३-११
( १ ) महाकवि कालिदासकी उत्पत्तिका प्रबन्ध .... .... ५
( २ ) सुवर्णपुरुषकी सिद्धिका प्रबन्ध .... .... .... ७
( ३ ) विक्रमादित्यके सत्त्वका प्रबन्ध .... .... .... ८
( ४ ) सत्त्वपरीक्षाका प्रबन्ध .... .... .... .... "
( ५ ) विद्यासिद्धिका प्रबन्ध .... .... .... .... "
( ६ ) निर्गर्वताका प्रबन्ध .... .... .... १०
२ सातवाहन राजाका प्रबन्ध .... .... .... १२-१३
३ शीलव्रतके विषयमें भूपराजाका प्रबन्ध .... .... १४
४ वनराजादि प्रबन्ध .... .... .... १५-१८
चावडा वंशकी राज्यसंवत्सरावलि .... .... .... —
— चौलुक्य वंशका प्रारंभ —
५ मूलराजका प्रबन्ध .... .... .... १९-२४
लाखाकी उत्पत्ति और विपत्तिका प्र० .... .... २३-२४
मूलराजके वंशजोंकी राज्यसंवत्सरावलि .... .... .... २५
६ मुंजराज प्रबन्ध .... .... .... २७-३२
— दूसरा प्रकाश —
७ भोज और भीमका प्रबन्ध .... .... .... ३३-६३
( १ ) भोजका विद्याविलास .... .... ३३-३६
( २ ) भोजकी गुजरातके राजा भीमके प्रति प्रतिस्पर्द्धा .... .... ३७
( ३ ) राजा भोजकी गुजरातपर आक्रमण करनेकी इच्छा .... .... ३९
( ४ ) दिगंबर कुलचन्द्रको सेनापति बनाना .... .... .... ४१
( ५ ) कुलचन्द्रकी गुजरातपर चढ़ाई .... .... .... "
( ६ ) महाकवि माघका प्रबन्ध .... .... .... ४३
( ७ ) महाकवि धनपालका प्रबन्ध .... .... ४५-५३
( ८ ) सर्वदर्शनोंसे सत्यमार्गकी पृच्छा .... .... .... "
( ९ ) सीता पण्डिताका प्रबन्ध .... .... .... "