प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)
Prabandhachintamani of Acharya Merutunga
आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ ] प्रबन्धचिन्तामणि [ प्रथम प्रकाश
इस प्रकार नीतिशास्त्रके उपदेशानुसार, मेरी आज्ञा भंग करके बिना शस्त्रके वध करनेवाले तुम पुत्रोंको
मैं क्या दंड दूं? इसके बाद राजाने आयुके १२० वें वर्षमें प्रायोपवेशन ( अन्न जलका त्याग ) कर चितामें
प्रवेश किया । इस राजाने भट्टारिका श्री योगेश्वरी का मन्दिर बनाया ।
२३) इस [ योगराज नामक ] राजाने ३५ वर्ष राज्य किया ।
सं० ८९७ से लेकर २५ वर्ष श्री क्षेमराजने राज्य किया ।
सं० ९२२ से लेकर २९ वर्ष तक श्री भूयड़ने राज्य किया। इसने श्री पत्तन नगरमें भूयडेश्वर का
मन्दिर बनवाया ।
सं० ९५१ से लेकर २५ वर्ष तक श्री वैर सिंहने राज्य किया ।
सं० ९७६ से लेकर १५ वर्ष तक श्री रत्नादित्यने राज्य किया ।
सं० ९९१ से लेकर ७ वर्ष तक श्री सामन्तसिंहने राज्य किया ।
इस प्रकार चापोत्कट वंशमें सात राजा हुए । विक्रमादित्य संवत् ९९८ वर्ष तक [ इस वंशका
राज्य रहा । ]
[ A प्रति और उसके साथ प्रायः मिलती हुई D प्रतिमें यह राजावली निम्नलिखित रूपसे मिलती है । ]
सं० *८... (?) श्रावण सुदी ४ से १० वर्ष १ मास १ दिन श्री योगराजने राज्य किया ।
स० ८....श्रावण सुदी ५ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और धनुष लग्नमें रत्नादित्य का राज्याभिषेक हुआ ।
सं० ८....कार्तिक सुदी ९ से लेकर ३ वर्ष ३ मास ४ दिनतक इस राजाने राज्य किया ।
सं० ८....कार्तिक सुदी ९ रविवारको मघा नक्षत्र और वृषलग्नमें श्रीवैर सिंह राज्यपर बैठा ।
सं० ८....ज्येष्ठ सुदी १० शुक्रवारसे लेकर ११ वर्ष ७ मास २ दिनतक इस राजाने राज्य किया ।
सं० ८....ज्येष्ठ सुदी १३ को हस्त नक्षत्र और सिंह लग्नमें श्री क्षेमराजदेव का राज्याभिषेक हुआ ।
सं० ९३....भादों सुदी १५ रविवारको, इस राजाको राज्य करते, ३८ वर्ष ३ महीना १० दिन
व्यतीत हुए थे ।
सं० ९३५ वर्षमें आश्विन सुदी १ सोमवारको रोहिणी नक्षत्र और कुम्भ लग्नमें श्रीचामुण्डराज
देव का पट्टाभिषेक हुआ ।
सं० ९....माघ वदी ३ सोमवारसे लेकर १३ वर्ष ४ मास १७ दिनतक इस राजाने राज्य किया ।
स० ९३८ (?) माघ वदी ४ मंगलवारको स्वाती नक्षत्र और सिंह लग्नमें श्री आगडदेव राज्यपर
बैठा । इसने कर्करापुरीमें आगडेश्वर और कण्टकेश्वरी के मंदिर बनवाये ।
सं० ९६५ पौष सुदी ९ बुधवारसे लेकर २६ वर्ष १ मास २० दिनतक इसने राज्य किया ।
सं० ९....पौष सुदी १० गुरुवारको आर्द्रा नक्षत्र और कुम्भ लग्नमें भूयगडदेव राज्यपर बैठा । इस
राजाने भूयगडेश्वर का मंदिर और श्रीपत्तन में प्रकार बनवाया ।
सं० ९....वर्षसे आषाढ़ सुदी १५ से लेकर २७ वर्ष ६ महिने ५ दिनतक इसने राज्य किया ।
इस प्रकार चापोत्कट वंशमें ८ पुरुष हुए । १९० वर्ष, २ मास, सात दिनतक इस वंशके राजाओंने
राज्य किया । ]
- जिन प्रतियोंमें यह पाठ मिलता है उनमें इन संवत् सूचक अंकोंके विषयमें बड़ी गड़बड़ी है। कहीं कोई अंक
लिखा हुआ मिलता है और कहीं कोई । प्रतियोंमें जो वर्ष मास आदि दिये गये हैं उनका इन अंकोंके साथ कोई मेल नहीं
मिलता। इसलिये हमने इन अंकोंके स्थान शून्य ही रखे हैं। आगेके भागमें जो ऐतिहासिक विवेचन किया गया है उससे इन
अंकोंकी निरर्थकता मालूम हो जायगी ।