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सर्वकोश
प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)

प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)

Prabandhachintamani of Acharya Merutunga

आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished181 पृष्ठ

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सिंघी जैन ग्रन्थमाला
जैन आगमिक, दार्शनिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक, कथात्मक-इत्यादि विविधविषयगुम्फित
प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश, प्राचीनगूर्जर, राजस्थानी आदि नाना भाषानिबद्ध
बहु उपयुक्त पुरातनवाङ्मय तथा नवीन संशोधनात्मक
साहित्यप्रकाशिनी जैन ग्रन्थावलि ।
कलकत्तानिवासी स्वर्गस्थ श्रीमद् डालचन्दजी सिंघी की पुण्यस्मृतिनिमित्त
तत्सुपुत्र श्रीमान् बहादुरसिंहजी सिंघी कर्तृक
संस्थापित तथा प्रकाशित
सम्पादक तथा सञ्चालक
जिन विजय मुनि
[ सम्मान्य सभासद-भाण्डारकर प्राच्यविद्या संशोधन मन्दिर पूना, तथा गुजरात साहित्यसभा अहमदाबाद;
भूतपूर्वाचार्य-गुजरात पुरातत्त्वमन्दिर अहमदाबाद; जैनवाङ्मयाध्यापक विश्वभारती, शान्तिनिकेतन;
पुरातत्त्वादि-प्रधानाध्यापक भारतीय विद्या भवन बंबई, तथा, जैन साहित्यसंशोधक ग्रन्थावलि-
पुरातत्त्वमन्दिर ग्रन्थावलि-भारतीय विद्या ग्रन्थावलि-अन्तर्गत संस्कृत-प्राकृत-पाली-
अपभ्रंश-प्राचीनगूर्जर-हिन्दी-आदि भाषामय अनेकानेक ग्रन्थ संशोधक-सम्पादक । ]
ग्रन्थांक ३
प्राप्तिस्थान
व्यवस्थापक - सिंघी जैन ग्रन्थमाला
अनेकान्त विहार, } ☙ { सिंघीसदन,
९, शान्तिनगर; पो० साबरमती, } ☙ { ४८, गरियाहाट रोड; पो० बालीगंज,
अहमदाबाद कलकत्ता
[ स्थापनाब्द ] सर्वाधिकार संरक्षित [ वि० सं० १९८६