सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 96

चौथा अध्याय : ग्रह बल ९५
चन्द्र क्रिया देखने के लिये एक नक्षत्र के ६० भाग
१३ अंश २० कला एक नक्षत्र का मान होता है। प्रत्येक भाग १३ कला,
२० विकला का होता है।
अंश कला विकला अं. क. वि. अं. क. वि. अं. क. वि.
( १) ०-१३-२० (१६) ३-३३-२० (३१) ६-५३-२० (४६) १०-१३-२०
( २) ०-२६-४० (१७) ३-४६-४० (३२) ७- ६-४० (४७) १०-२६-४०
( ३) ०-४०- ० (१८) ४- ०- ० (३३) ७-२०- ० (४८) १०-४०- ०
( ४) ०-५३-२० (१९) ४-१३-२० (३४) ७-३३-२० (४९) १०-५३-२०
( ५) १- ६-४० (२०) ४-२६-४० (३५) ७-४६-४० (५०) ११- ६-४०
( ६) १-२०- ० (२१) ४-४०- ० (३६) ८- ०- ० (५१) ११-२०- ०
( ७) १-३३-२० (२२) ४-५३-२० (३७) ८-१३-२० (५२) ११-३३-२०
( ८) १-४६-४० (२३) ५- ६-४० (३८) ८-२६-४० (५३) ११-४६-४०
( ९) २- ०- ० (२४) ५-२०- ० (३९) ८-४०- ० (५४) १२- ०- ०
(१०) २-१३-२० (२५) ५-३३-२० (४०) ८-५३-२० (५५) १२-१३-२०
(११) २-२६-४० (२६) ५-४६-४० (४१) ९- ६-४० (५६) १२-३६-४०
(१२) २-४०- ० (२७) ६- ०- ० (४२) ९-२०- ० (५७) १२-४०- ०
(१३) २-५३-२० (२८) ६-१३-२० (४३) ९-३३-२० (५८) १२-५३-२०
(१४) ३- ६-४० (२८) ६-२६-४० (४४) ९-४६-४० (५९) १३- ६-४०
(१५) ३-२०- ० (३०) ६-४०- ० (४५) १०-०- ० (६०) १३- २०-०
उदाहरण के लिये किसी का चन्द्र स्पष्ट ११-२०-३७-२१ है तो रेवती
नक्षत्र का मान ११-१६-४० से १२-०-० तक होने से
स्पष्ट चन्द्र ११-२०-३७-२१
रेवती नक्षत्र का प्रारंभ ११-१६-४०- ०
गत रेवती नक्षत्र ―――――――――――
३-५७-२१