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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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७२ फलदीपिका
समझना चाहिये । प्रथम ६ अवस्थाओं में ग्रह शुभ फल देता है । उच्च में
१६ आना शुभ; सुखित में १४ आना; स्वराशि में १२ आना, 'मित्र राशि
में १० आना, शान्त अवस्था में ८ आना और शक्त अवस्था में ६ आना
शुभ। निपीडित अवस्था में ६ आना अशुभ, खल अवस्था में ८ आना अशुभ
फल; सुदुःखित अवस्था में १० आना अशुभ फल, नीच राशि में १२ आना
अशुभ फल, और विकल अवस्था में १६ आना अर्थात् पूर्ण अशुभ फल
समझना चाहिये । अच्छी अवस्था वाले ग्रह की दशा अन्तर्दशा में शुभ
परिणाम होंगे । निकृष्ट अवस्था वाले ग्रह की दशा अन्तर्दशा में अशुभ
फल होगा ॥ १८-२० ॥