फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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(ख) यदि संख्या ४, ५, ६, ७, ८, ९, इनमें से कोई हो तो
भोग ।
(ग) यदि संख्या १०, ११, १२ इनमें से कोई हो तो 'व्यथा'
अर्थात् कष्ट ।
(घ) यदि संख्या १३, १४, १५, १६, १७, १८ इनमें से कोई हो
तो नवीन वस्त्र की प्राप्ति ।
(ङ) यदि संख्या १९, २०, २१ इनमें से कोई हो तो "हानि" ।
(च) यदि संख्या २२, २३, २४, २५, २६, २७ इनमें से कोई
हो तो विपुल धन की प्राप्ति ।
क्रमेण भाग्योदयमर्थहानिं जयं भयं शोकमरोगतां च ।
सुखान्यनिष्टं गदमिष्टसिद्धिं मोदं व्ययं च प्रददाति चन्द्रः ॥१२॥
चन्द्र
जन्मकालीन चन्द्र राशि से जब गोचर से चन्द्रमा विविध
राशियों में आता है तो क्रमशः निम्नलिखित फल होते हैं :—
(१) भाग्योदय (२) धनहानि (३) जय (४) भय (५) शोक
(६) अरोगता (७) सुख (८) अनिष्ट फल (९) रोग (१०) इष्ट-
सिद्धि—कार्य में सफलता (११) प्रसन्नता (१२) व्यय ।
जन्मकालीन चन्द्र राशि में हो तो भाग्योदय । द्वितीय में हो
तो धनहानि, तृतीय में जय, जन्मकालीन चन्द्र राशि से चौथी
राशि में गोचर से चन्द्र आये तब भय—इसी प्रकार सर्वत्र समझना
चाहिये ॥ १२ ॥
अन्तः शोकं स्वजनविरहं रक्तपित्तोष्णरोगं
लग्ने वित्ते भयमपि गिरां दोषमर्थक्षयं च ।