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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 592, कुल 684 में से

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पृष्ठ 592

चौबीसवां अध्याय : अष्टकवर्गफल ५९१
एवं गुणित्वा संयोज्य सप्तभिर्गुणयेत्पुनः ।
सप्तविंशहताल्लब्धवर्षाण्यत्र भवन्ति हि ॥२७॥
द्वादशाद्गुणयेल्लब्धा मासाहर्घटिकाः क्रमात् ।
सप्तविंशति वर्षाणि मण्डलं शोधयेत्पुनः ॥२८॥
अब इस योग २०९ को ७ से गुणा कीजिये और २७ से भाग दीजिये
जो लब्धि होगी वह वर्ष होंगे । १२ से गुणा कर २७ से भाग देने पर
लब्धि आवे वह मास हां गे, जो शेष बचे उसे ३० से गुणा कर २७ से भाग
दीजिये, जो लब्धि आवे उतने दिन होंगे । इसी प्रकार ६० से गुणा कर
२७ से भाग देने से घड़ी .आ जावेगीं
सबको जोड़िये । २७ वर्ष का एक मंडल होता है । इसलिये यदि
२७ वर्ष से अधिक वर्ष आवें तो २७ कम करके जो संख्या आवे—उतने
वर्ष उस ग्रह की दशा समझनी चाहिये । अब उदाहरण कुंडली में ग्रहों
की दशा निकाल कर बताया जाता है ।
(१) सूर्याष्टक वर्ग का राशि ग्रह योग पिण्ड २०९ है । इसको ७ से
गुणा किया = १४६३ । इसको २७ से भाग दिया = ५४ वर्ष । शेष ५ बचे,
इस को १२ से गुणा किया = ६० । इस को २७ से भाग दिया = २
मास । शेष को ३० से गुणा कर के २७ का भाग दिया = ७ दिन ।
क्योंकि ५४ वर्ष २ मास ७ दिन, २७ वर्ष से अधिक हैं २७ वर्ष
कम किये शेष २७ वर्ष २ मास ७ दिन । सूर्य की दशा ।
(२) इसी प्रकार चन्द्राष्टक वर्ग का योग पिंड ११० । इसको
७ से गुणा किया = ७७० । इसको २७ से भाग दिया । = २८ वर्ष
६ मास ७ दिन । २७ वर्ष कम किये शेष १ वर्ष ६ मास ७ दिन
चन्द्रमा की दशा ।