फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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गुणक (प्रत्येक संख्या को किस ग्रह भेद से किस संख्या से गुणा करना
चाहिये--इसे ग्रह गुणक कहते हैं) से गुणा करे ।
प्रत्येक राशि के गुणक अलग-अलग होते हैं । इसी प्रकार प्रत्येक
ग्रह के गुणक अलग अलग होते हैं । यह पृ० ५८५ पर दिये गये हैं:—
सूर्य आदि सातों ग्रहों के राशि गुणक तथा ग्रह गुणक नीचे
लिखे प्रकार से किये जावेंगे । पहले सूर्य का एकाधिपत्य शोधनचक्र
देखिये ।
मेष में ० इसका है गुणक ७ है । किन्तु ० को ७ से गुणा किया तो
० ही आया । इस कारण मेष में राशि गुणक के स्थान में कुछ नहीं
रखा । वृष में ४ लिखा है । वृष की गुणक संख्या १० है ४ × १० = ४०
इस कारण ४० लिखा । कर्क में ३ लिखा है इसकी गुणक संख्या ४
है । इस कारण ३ × ४ = १२ लिखा ।
अब ग्रह गुणक लीजिये । मेष में शनि है शनि का गुणक ५ है किन्तु मेष
में ० होने से ० × ५ = ० । इस कारण मेष के नीचे ० रखा । वृश्चिक में ४
लिखा है और सूर्य, मंगल, शुक्र यह तीन ग्रह हैं । सूर्य का गुणक ५,
मंगल का ८, शुक्र का ७ है । इस कारण
(वृश्चिक राशि { ४ × ५ (सू०) = २०
४ संख्या है { ४ × ८ (मं०) = ३२
इसलिये) { ४ × ७ (शु०) = २८
८०
८० वृश्चिक के नीचे लिखा । धनु में १ है । और बुध धनु में है ।
बुध का गुणक ५ है । इस प्रकार १ × ५ = ५ । यह धनु के नीचे लिखा
इस प्रकार आगे चन्द्राष्टक वर्ग आदि में राशि गुण के और ग्रह गुणक
से गुणा कर संख्या लिखी गई हैं ।