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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 572, कुल 684 में से

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पृष्ठ 572

चौबीसवां अध्याय : अष्टकवर्गफल ५७१
(ख) यदि त्रिकोण की एक राशि में शून्य हो तो उस शून्य
को त्रिकोण की अन्य दो राशियों को घटाने से कोई अन्तर नहीं
पड़ेगा और त्रिकोण की अन्य दो राशियों में जो संख्या पहिले से थी
वह वैसी की वैसी रहेगी ।
(ग) यदि त्रिकोण की तीनों राशियों में समान संख्या हो तो
-उस संख्या को त्रिकोण की तीनों राशियों में से घटाने से-तीनों
ही जगह ० शेष रहेगा । उदाहरण के लिये आपको मंगल के अष्टक
वर्ग में त्रिकोण शोधन करना है और वृष, कन्या, मकर इस त्रिकोण
का शोधन करना है; तो देखिये मंगल के अष्टक वर्ग में वृष में ४
संख्या है, कन्या में भी ४ है तथा मकर में भी ४ । अब इस '४' को
वृष के ४ में से घटाया तो ४-४ = ० शेष रहा । इसी प्रकार कन्या
में ४-४ = ० और मकर में भी ४-४ = ० शेष हुआ । यह ऊपर
जो प्रथम मत बताया गया है वह पराशर का है ।
दूसरा मत :
अब दूसरा मत दिया जाता है ।
मान लीजिये आप को सूर्याष्टक वर्ग का त्रिकोण शोधन करना
है । मेष में ३ है, सिंह में ५ तथा धनु में ४ । इन तीनों में सब से
कम संख्या ३ है । इसलिये मेष में ३, सिंह में भी ३ रखिये तथा
धनु में भी ३ ।
वृषभ में ७ है, कन्या में ३ तथा मकर में ३ तो, इनमें न्यून
संख्या ३ है । इस कारण वृष में भी ३ रखिये, कन्या में ३ तथा मकर
में ३ तो रहेंगी ही ।
सूर्याष्टक वर्ग में मिथुन में ४, तुला में ४ तथा कुंभ में ५ है।
सबसे कम ४ है—इसलिये कुंभ में ४ स्थापित कीजिये । मिथुन तथा
तुला में तो—प्रत्येक में ४ रहेंगी ही ।
कर्क में ४, वृश्चिक में ५ तथा मीन में १ है। सबसे कम '१'