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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 569, कुल 684 में से

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पृष्ठ 569

५६८ फलदीपिका
क्या विचार है यह बताने से पहिले इस विषय का थोड़ा सा परिचय
दे देना जरूरी है जिससे पाठकों को श्लोकों को समझने में कठिनता
न हो ।
(i) मेष, सिंह और धनु एक त्रिकोण बनाते हैं क्योंकि मेष से
सिंह पाँचवीं राशि, सिंह से धनु पाँचवीं और धनु से मेष पाँचवीं राशि
होती है ।
(ii) इसी प्रकार वृष कन्या और मकर यह दूसरा त्रिकोण हुआ ।
(iii) मिथुन, तुला, कुंभ यह तीसरा त्रिकोण हुआ ।
(iv) कर्क, वृश्चिक, मीन यह चौथा त्रिकोण हुआ ।
पहिले अष्टक वर्ग बनाने का प्रकार बता चुके हैं । सूर्य, चन्द्र,
मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि इन सातों ग्रहों के सात अष्टक वर्ग
बने । प्रत्येक अष्टक वर्ग का अलग-अलग त्रिकोण शोधन होता है ।
मान लीजिये आपको सूर्य अष्टक वर्ग का त्रिकोण शोधन करना है तो
देखिये मेष, सिंह तथा धनु तीनों राशियों में कितने बिन्दु हैं :
मेष में ३, सिंह में ५ तथा धनु में ४ हैं ।
अब संस्कृत के आचार्यों में—ज्योतिष के मनीषियों में—विविध
उद्भट विद्वानों में मतभेद है कि त्रिकोण शोधन किस प्रकार किया
जावे :
(१) प्रथम मत यह है कि त्रिकोण की तीनों राशियों में—जिसमें
सबसे कम संख्या हो उसे अन्य त्रिकोण की बाकी जो दो राशियाँ
हैं—उनमें जो संख्या है—उनमें से घटाइये । उदाहरण के लिये सूर्य के
अष्टक वर्ग में मेष में ३, सिंह में ५ तथा धनु में ४ हैं । इन तीनों में
सबसे कम संख्या ३ है तो इस ३ को सिंह राशि में जो ५ संख्या
है उसमें से घटा कर सिंह राशि के नीचे ५—३ = २ स्थापित

  • आगे के पृष्ठ पर सर्वाष्टक वर्ग दिया जा रहा है जिसकी
    त्रिकोण शोधन में आवश्यकता पड़ेगी ।