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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 566

चौबीसवां अध्याय : अष्टकवर्गफल ५६५
भौमात्तृतीयाराशिस्थफलैर्भ्रातृगणं वदेत् ।
बुधात्सुखफलैर्बन्धुगणं वा मातुलस्य च ॥६॥
मंगल के अष्टक वर्ग में—मंगल जिस राशि में है उससे तृतीय
राशि में मंगल के अष्टकवर्ग में कितने शुभ बिन्दु हैं यह देखिये ।
उतने ही भाई उस जातक के होंगे। बुध के अष्टक वर्ग में बुध जिस
राशि में है उससे चौथी राशि में कितने शुभ बिन्दु हैं ? जितने शुभ
बिन्दु हों उतने ही मामा या बन्धु होंगे ॥९॥
गुरुस्थितसुतस्थाने यावतां विद्यते फलम् ।
शत्रु नीचग्रहं त्यक्त्वा शेषास्तस्यात्मजाः स्मृताः ॥१०॥
बृहस्पति के अष्टकवर्ग में बृहस्पति जिस राशि में है—उससे पंचम
राशि में जितने शुभ बिन्दु होंगें उतने ही पुत्र होंगे । किन्तु यदि किसी
शत्रु या नीच ग्रह ने इस राशि में बिन्दु प्रदान किया हो—ऐसे शत्रु, नीच
ग्रह के बिन्दु कम कर दीजिये ॥१०॥
गुरोरष्टकवर्गे तु शोध्यशिष्टफलानि वै ।
क्रूरराशिफलं त्यक्त्वा शेषास्तस्यात्मजाः स्मृताः ॥११॥
बृहस्पति के अष्टकवर्ग में त्रिकोण शोधन और एकाधिपत्य शोधन
के बाद जो संख्या आवे—उसमें से क्रूर राशियों में जो बिन्दु हों उन्हें
कम कर दीजिये । शेष जितने बचें उतने ही पुत्र होंगे ॥११॥
फलाधिकं भृगोर्यत्र तत्र भार्याजनिर्यदि ।
तस्यां वंशाभिवृद्धिः स्यादल्पे क्षीणार्थसंततिः ॥१२॥
शुक्र के अष्टक वर्ग में जिन राशियों में अधिक शुभ बिन्दु हैं उस