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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 517

५१६ फलदीपिका।
मकर-शनि के ४, कुंभ-शनि के ४ और ८ वर्ष ६ मास २७
दिन मीन-बृहस्पति के इस प्रकार कुल १६ व. ६ मा. २७ दि. भुक्त
हुए। मीन बृहस्पति के कुल १० वर्ष हैं। इसमें से ८ वर्ष ६ मास २७
दिन घटाये तो १ वर्ष ५ मास ३ दिन शेष रहे। यह मीन-बृहस्पति के
भोग्य हुए फिर वृश्चिक मंगल के ७ वर्ष इत्यादि। इस व्यक्ति की
महादशा सारिणी निम्नलिखित हुई ।
देह राशि-मकर कालचक्र महादशा जीवराशि मिथुन
देहाधिप-शनि जीवाधिप बुध
राशि तथा राशि स्वामी वर्ष मास दिन
मीन बृहस्पति १-५-३
वृश्चिक मंगल ७-०-०
तुला शुक्र १६-०-०
कन्या बुध ९-०-०
कर्क चन्द्र २१-०-०
सिंह सूर्य ५-०-०
मिथुन बुध ९-०-०
६८-५-३
इसके बाद रेवती तृतीय नक्षत्र की जो सारिणी दी गई है वह
चलेगी। देखिये सारिणी ख में रेवती तृतीय नक्षत्र की राशि दशायें
वृष शुक्र से प्रारम्भ होती हैं इसलिये देह राशि वृष, देहाधिप शुक्र
हो जावेगा। रेवती तृतीय नक्षत्र की जो राशिया दी गई हैं उनका
अन्त मिथुन से होता है। इसलिये जीव राशि मिथुन और इसका
स्वामी बुध जीवाधिप हुआ; ६८ वर्ष ५ मास ३ दिन के बाद ।