सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 515, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 515

५१४ फलदीपिका
चन्द्र १०० वर्ष ८५ वर्ष ८३ वर्ष ८६ वर्ष
कला
.२१ १०- ६- ० ८-११- ३ ८- ८-१७ ९- ०-११
२२ ११- ०- ० ९- ४- ६ ९- १-१७ ९- ५-१६
२३ ११- ६- ० ९- ९- ९ ९- ६-१६ ९-१०-२०
२४ १२- ०- ० १०- २-१२ ९-११-१६ १०- ३-२५
२५ १२- ६- ० १०- ७-१५ १०- ४-१५ १०- ९- ०
नोट :—जहाँ आधे से अधिक दिन अर्थात् ३० घड़ी से अधिक आया है
उसको १ दिन मान लिया गया है और जहाँ आधे दिन से कम
अर्थात् ३० घड़ी से कम समय आया है--उन दिनों को छोड़
दिया गया है।
उदाहरण :
मान लीजिये किसी का स्पष्ट चन्द्र ११-२०-३९ है। अर्थात् जन्म
के समय चन्द्रमा मीन राशि के २० अंश ३९ कला पर था। यह
रेवती नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ । देखिये सारिणी 'क' । रेवती
द्वितीय चरण की परमायु ८५ वर्ष है । ८५ वर्ष वाली सारिणी न० २
में देखिये । यह सारिणी पुस्तक के अन्त में दी गई है।
व. मा. दि
११-२०-२५ की भोग्य दशा ७४-४-१५ है
११-२०-५० की भोग्य दशा ६३-९- ०
हमें ११-२०-३९ की भोग्य दशा निकालनी है।
अब चाहे ११-२०-२५ में से (३९-२५ = १४) चौदह कला का
मान निकाल दीजिये, चाहे ११-२०-५० में (५०-३९ = ११) ग्यारह
कला का मान जोड़िये—भोग्य दशा निकल आवेगी ।