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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 504

बाईसवाँ अध्याय : मिश्रदशा ५०३
९. कृत्तिका प्र. च. (०-२६-४० से १-०-०) मे. वृ. मि. कक, सिं.
कन्या. तु. वृ. ध.
१०. द्वि. च. (१-०-० से १-३-२०) म. कुं. मी. वृश्चि. तु.
कन्या, कर्क, सिं. मि.
११. तृ. च. (१-३-२० से से १-६-४०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध.
मे. वृ. मि.
१२. च. च. (१-६-४० से १-१०-०) कर्क, सिं. कन्या. तु.
वृश्चि. ध. म. कुं. मी.
१३. रोहिणी प्र. च. (१-१०-० से १-१३-२०) ध. म. कुं. मी. मे. वृ.
मि. सिं. कर्क
१४. द्वि. च. (१-१३-२० से १-१६-४०) कन्या तु. वृश्चि.
मी. कुं. म. ध. वृश्चि. तु.
१५. तृ. च. (१-१६-४० से १-२०-०) कन्या, सिं. कर्क, मि.
वृ. मे. ध. म. कुं.
१६. च. च. (१-२०-० से १-२३-२०) मी. मे. वृ. मि. सिं.
कर्क, कन्या, तु. वृश्चि.
१७. मृगशिर प्र. च. (१-२३-२० से १-२६-४०) मी. कुं. म. ध. वृश्चि.
तु. कन्या. सिं. कर्क
१८. द्वि. च. (१-२६-४० से २-०-०) मि. वृ. मे. ध. म. कुं.
मी. मे. वृ.
१९. तृ. च. (२-०-० से २-३-२०) मि. सिं. कर्क, कन्या, तु.
वृ. मी. कुं. म.
२०. च. च. (२-३-२० से २-६-४०) ध. वृश्चि. तु. कन्या. सिं.
कर्क, मि. वृ. मे.