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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 492, कुल 684 में से

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बाईसवाँ अध्याय : मिश्रदशा ४९१
लिये भी लागू होगा—अश्विनी के प्रथम चरण वाला क्रम कृत्तिका के
प्रथम चरण को, अश्विनी के द्वितीय चरण का क्रम कृत्तिका के द्वितीय
चरण को इत्यादि ।
रोहिणी और मृगशिर राशियों के भिन्न-भिन्न चरणों में जन्म
होने से क्या दशाक्रम होता है यह नीचे के श्लोकों में बतावेंगे ।
मृगशिर के चारों चरणों के लिये जो क्रम नीचे बतावेंगे वह
क्रमशः आर्द्रा के चारों चरणों को भी लागू होगा । मृगशिर के प्रथम
चरण का क्रम आर्द्रा के प्रथम चरण को; मृगशिर के द्वितीय चरण
वाला क्रम आर्द्रा के द्वितीय चरण को····इत्यादि ।।७।।
धेनुः क्षेत्रे पुरगो शंभु-
स्तासां जत्रु क्षन्निधि दासी ।
चर्मभोगी रायधिनाक्ष-
स्त्रीपौराङ्गी शिवतीर्थाब्जे ॥८॥
जिसका रोहिणी के प्रथम चरण में जन्म हो उसको (i) धनु बृहस्पति
(ii) मकर-शनि (iii) कुंभ-शनि (vi) मीन-बृहस्पति (v) मेष-मंगल
((vi) वृषभ-शुक्र (vii) मिथुन-बुध (viii) सिंह-सूर्य (ix) कर्क-चन्द्र
यह नौ दशाएँ होती हैं ।
जिसका रोहिणी के द्वितीय चरण में जन्म हो उसे (i) कन्या-
बुध (ii) तुला-शुक्र (iii) वृश्चिक-मंगल (iv) मीन-बृहस्पति (v)
कुंभ-शनि (vi) मकर-शनि (vii) धनु-बृहस्पति (viii) वृश्चिक-मंगल
(ix) तुला-शुक्र यह नौ दशाएँ होती हैं ।
जिसका रोहिणी तृतीय चरण में जन्म हो उसे (i) कन्या-बुध
(ii) सिंह-सूर्य (iii) कर्क-चन्द्र (iv) मिथुन-बुध (v) वृषभ-शुक्र
(vi) मेष-मंगल (vii) धनु-बृहस्पति (viii) मकर-शनि (ix) और
कुंभ-शनि यह नौ दशाएँ होती हैं।