फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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ताताम्बे रविभार्गवौ दिवि निशि प्राभाकरीन्दू स्मृतौ
तद्व्यस्तेन पितृव्यमातृभगिनीसंज्ञौ तदा तत्क्रमात् ।
वामाक्षीन्दुरिनोऽन्यदक्षि कथितो भौमः कनिष्ठानुजो
जीवो ज्येष्ठसहोदरः शशिसुतो दत्तात्मजः संज्ञितः ॥२५॥
अब यह बताते हैं कि किस-किस ग्रह से क्या-क्या और विचार करना
चाहिये ।
सूर्य—यदि दिन में जन्म हो तो पितृ कारक, यदि रात्रि में जन्म हो तो
चाचा का कारक । शरीर में दक्षिण नेत्र पर इसका विशेष अधिकार है ।
चन्द्रमा—यदि रात्रि में जन्म हो तो मातृ कारक, यदि दिन में जन्म
हो तो चन्द्रमा से मौसी का विचार करें । शरीर में, बायें नेत्र पर इसका
विशेष अधिकार है ।
मंगल—मंगल से छोटे भाई का विचार करना चाहिये ।
बुध—गोद लिया हुआ पुत्र (दत्तक पुत्र) ।
वृहस्पति—बड़ा भाई ।
शुक्र—यदि दिन में जन्म हो तो मातृ कारक, यदि रात्रि में जन्म हो
तो इससे मौसी का विचार करे ।
शनि—यदि दिन में जन्म हो तो चाचा का विचार इससे करे और
यदि रात्रि में जन्म हो तो इससे पिता का विचार करे ॥ २५ ॥
देहो देही हिमरुचिरिनस्त्विन्द्रियाण्यारपूर्वा
आदित्यद्विड्गुलिकशिखिनस्तस्य पीडाकराः स्युः ।
गन्धः सौम्यो भृगुजशशिनौ द्वौ रसौ सूर्यभौमौ
रूपौ शब्दो गुरुरथ परे स्पर्शसंज्ञाः प्रदिष्टाः ॥२६॥
प्रत्येक ग्रहों से अनेक बातों का विचार किया जाता है । यहां कुछ
और विषय बताये जाते हैं कि किसका विचार किससे किया जाय ।
सूर्य आत्मा है, चन्द्रमा शरीर है, मंगल आदि पांचों ग्रहों का पांचों