फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदूसरा अध्याय : ग्रह भेद ३७
पड़ा है तो वह पचास वर्ष की अवस्था में भी ३० वर्ष के समान प्रतीत
होगा ॥ १० ॥
अब बुध का स्वरूप तथा प्रकृति बतलाते हैं। बुध के शरीर की कान्ति
नवीन दूब के समान है। इसमें वात, पित्त, कफ, त्रिदोषों का सम्मिश्रण
है। इसका आशय यह है कि जन्मकुण्डली में बुध यदि पीड़ित हो तो
अपनी दशा-अन्तर्दशा में वायु से उत्पन्न, कफ से उत्पन्न तथा पित्त से
उत्पन्न तीनों प्रकार के रोग उत्पन्न कर सकता है। यह नसों से युक्त हैं
(कहने का तात्पर्य यह है कि शरीर में जो स्नायु मंडल है—जिसे अंग्रेजी
में नर्वस सिस्टम कहते हैं उसका अधिष्ठाता बुध है। यदि बुध पीड़ित होतो
नर्वस सिस्टम में खराबी होगी।) बुध स्वभाव से मधुर वाणी बोलने वाला
होता है। इसके शरीर के अंग बराबर हैं अर्थात् सुडौल हैं। जो जितना
बड़ा होना चाहिये वह अंग वैसा ही है। बुध मज़ाकपसंद है। जिन
स्त्रियों या पुरुषों की कुण्डलियों में बुध चन्द्रमा से युक्त होता है वे
मज़ाकपसंद होते हैं। कोई-न-कोई तमसखुर की बात बोलते रहते हैं।
जिस प्रकार मंगल में मज्जा प्रधान है इसी प्रकार बुध त्वचा प्रधान है।
त्वचा शरीर के सबसे ऊपर की जिल्द (खाल) को कहते हैं। बुध अच्छा
होने से त्वचा अच्छी होगी, बुध पापाक्रान्त होने से त्वचा के रोग होंगे।
बुध के नेत्र लंबाई लिये हैं और वह हरे वस्त्र धारण करता है। यह बुध
का स्थूल परिचय है; अब बृहस्पति के विषय में कहते हैं ॥ ११ ॥
बृहस्पति का पीला वर्ण है किन्तु नेत्र और सिर के बाल कुछ भूरापन
लिये हुए हैं। इसकी छाती पुष्ट और ऊंची है और बड़ा शरीर है। यह कफ
प्रधान है। वैद्यक शास्त्र में कफ प्रकृति वालों में जो लक्षण बताये गये हैं,
वे उस व्यक्ति में घटित होंगे जिसकी कुण्डली में बलवान् बृहस्पति लग्न में
होगा या बलवान् होकर नवांश का स्वामी है। बृहस्पति बलवान् होने से
मनुष्य बहुत बुद्धिमान् होता है; बुध से भी बुद्धि देखी जाती है और
बृहस्पति से भी। तब दोनों से ही बुद्धि का विचार किया जावे तो तारतम्य
क्या होगा ? बुध से किसी बात को शीघ्र समझ लेना, किसी विषय का