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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 684 में से

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पृष्ठ 376

उन्नीसवां अध्याय : दशाफल ३७५
७. यदि सूर्य और मंगल दशम में हों तो जातक धनी होता
है किन्तु बृहस्पति की दशा मारक होती है ।
८. यदि बुध और शुक्र १२वें भाव में हों तो शुक्र दशा में
राजयोग होता है ।
९. यदि चन्द्रमा और बृहस्पति लग्न में हों तो जातक भाग्यवान्
और प्रसिद्ध हो; यह विशेष राज योग है ।
१०. यदि कर्क राशि का चन्द्रमा लग्न में हो और सप्तम में
मकर का मंगल हो तो राज योग होता है ।
११. कर्क का चन्द्रमा लग्न में और चतुर्थ में तुला राशि का
शनि हो तो राज योग है ।
१२. कर्क लग्न हो, लग्न में चन्द्रमा और दशम में मेष का
सूर्य हो तो राज योगकारक है ।
१३. यदि बुध और वृहस्पति ग्यारहवें हों, शनि राहु, पंचम में हों
तो राहु की महादशा में गंगा स्नान आदि शुभ फल होते हैं ।
सिंह लग्न
अब नीचे सिंह लग्न वाली जन्म कुंडलियों के योग दिये जाते हैं ।
१. यदि सिंह लग्न हो और सूर्य, मंगल और बुध एक साथ बैठे हों
तो जातक बहुत धनी होता है ।
यहाँ लग्नेश, द्वितीयेश, लग्नेश लाभेश को युति से धनयोग हुआ
और सिंह लग्न वाले जातक को मंगल केन्द्र और त्रिकोण का मालिक
होने के कारण योग कारक हुआ । इस कारण सूर्य, मंगल, बुध के योग को
*कर्क लग्न के जितने योग दिये हैं—उनमें प्रत्येक जगह यह
नहीं लिखा है कि यदि कर्क लग्न हो—परन्तु कर्क लग्न सम्बन्धी यह
योग हैं ऐसा समझना चाहिये ।