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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 341, कुल 684 में से

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पृष्ठ 341

३४० फलदीपिका
(५) राजा और (६) लोहे के पदार्थ से आजीविका कमाने
वाला। ॥७॥
(v) यदि चन्द्रमा सिंह में हो और भिन्न-भिन्न ग्रहों से दृष्ट
हो तो निम्नलिखित फल होता है (१) सू० से राजा (२) म० से
राजा (३) बु० से ज्योतिष शास्त्र जानने वाला (४) बृ० से
धनाढ्य (५) शु० से राजा और (६) श० से नाई होता है । जो
नाई नहीं होते वे नाई सदृश काम करने वाले होते हैं ।
(vi) यदि चन्द्रमा कन्या राशि में हो और सूर्य आदि ६
ग्रहों से दृष्ट हो तो निम्नलिखित फल होता है । (१) सू० से
राजा (२) मं० से चतुर (३) बु० से राजा (४) बृ० से
सेनापति (५) शु० से चतुर (६) श० से भूमिनाथ (ज़मीन का
स्वामी) । ॥८॥
(vii) यदि चन्द्रमा तुला में हो और सूर्य आदि ग्रहों में से
किसी से दृष्ट हो तो क्रमशः निम्नलिखित फल होता है (१) सू० से
खल (दुष्ट) (२) मं० से शठ (शैतान) (३) बु० से राजा
(४) बृ० से सोने का काम करने वाला (५) शु० से व्यापारी
(६) श० से चूगल खोर ।
(viii) यदि चन्द्रमा वृश्चिक में हो तो उस पर भिन्न-भिन्न
ग्रहो की दृष्टि का निम्नलिखित फल होता है (१) सूर्य से दृष्ट
हो तो निर्धन (२) मंगल से राजा (३) बुध से दृष्ट हो तो जुड़वे
बच्चों का पिता या माता (४) वृहस्पति से दृष्ट हो तो राजा (५)
शुक्र से दृष्ट हो तो वस्त्र से आजीविका कमाने वाला (६) शनि से
हो तो विकृत अंग वाला । ॥९॥
(ix) यदि जन्म के समय चन्द्रमा धनु में हो और किसी ग्रह से
दृष्ट हो तो विविध ग्रहों की दृष्टि के अनुसार निम्नलिखित फल होता
है। (१) सू० से दृष्ट हो तो दम्भ युक्त (२) मंगल से धूर्त (३)
ब० से हो तो बहुत से आदमियों का स्वामी (४) वृहस्पति से दृष्ट