सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 275

२७४ फलदीपिका
पैत्त्यज्वरोष्णैर्जठराग्निनाजे
वृषे त्रिदोषैर्दहनाच्च शस्त्रात् ।
युग्मे तु कालश्वसनोष्णशूलै-
रुन्मादवातारुचिभिः कुलीरे ॥१७॥
मृग्ज्वरस्फोटजशत्रुजं हरौ
स्त्रियां स्त्रियागुह्यरुजा प्रपातनात् ।
तुलाधरे धीज्वरसंनिपातजं
प्लीहालिपाण्डुग्रहणोरुजालिनि ॥१८॥
वृक्षाम्बुकाष्ठायुधजं हयाङ्गे
मृगे तु शूलारुचिधीभ्रमाद्यैः ।
कुम्भे तु कासज्वरयक्ष्मरोगै
र्जले विपद्वा जलरोगतोऽन्त्ये ॥१९॥
पापर्क्षयुक्ते निधने सपापे
शस्त्रानलव्याघ्रभुजङ्गपीडा
अन्योन्यदृष्टौ व्यशुभौ सकेन्द्रौ
कोपात्प्रभोः शस्त्रविषाग्निजैर्वा ॥२०॥
सौम्यांशके सौम्यगृहेऽथ सौम्य-
सम्बन्धगे वा क्षयभे क्षयेशे ।
अक्लेशजातं मरणं नराणां
व्यस्ते तदा क्रूरमृतिं वदन्ति ॥२१॥
मृत्यु का कारण
अब मृत्यु का कारण तथा किस प्रकार मृत्यु होती है यह बताते हैं।