सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

२२ फलदापका
ग्रह राशि मूलत्रिकोण अपनीराशि
बुध कन्या १५°-२०° २०°-३०° स्वराशि
वृहस्पति धनु ०-१०° शेष स्वराशि
शुक्र तुला ०-५° शेष स्वराशि
शनि कुंभ ०°-२०° शेष स्वराशि
अब राशियों को मनुष्य, कीट (कीड़ा) जल, तथा चतुष्पाद इन चार
भागों में विभाजित करते हैं ।
मनुष्य चतुष्पाद कीट जलचर
मिथुन मेष वृश्चिक कर्क
कन्या वृष मकर (उत्तरार्द्ध)
तुला मीन
धनु (पूर्वार्ध) सिंह
धनु (उत्तरार्द्ध)
कुंभ मकर (पूर्वार्द्ध)
गोकर्क्यश्व्यजनक्रभान्यथ नृयुङ्मीनौ परे राशय-
स्ते पृष्ठोभयकोदयाः समिथुनः पृष्ठोदयाश्चैन्दवाः ।
सौराः शेषगृहाः क्रमेण कथिता रात्रिद्युसंज्ञाः क्रमा-
दूर्ध्वाधःसमवक्रभानि तु पुनस्तीक्ष्णांशुमुक्ताद् गृहात् ॥८॥
अब कौन-सी राशि अपने आगे की ओर से उदय होती है, कौन-सी
पीछे की ओर से और कौन-सी दोनों ओर से यह बताते हैं ।
मेष पृष्ठोदय कर्क पृष्ठोदय
वृष पृष्ठोदय सिंह शीर्षोदय
*मिथुन उभयोदय कन्या शीर्षोदय
शीर्षोदय—सिर या आगे की ओर से उदय होने वाली ।
*१. बृहज्जातक के मतानुसार मिथुन शीर्षोदय है ।