फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
पृष्ठ 247, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ें२४६ फलदीपिका
विलग्नकामात्मजनायकानां योगात्समानाय्य दशां महाख्याम् ।
सुतस्थतद्वीक्षकतत्पतीनां दशापहारेषु सुतोद्भवः स्यात् ॥२७॥
पुत्र प्राप्ति कब होगी यह समय निकालने के लिये एक अन्य
प्रकार और बताते हैं । नीचे लिखे तीनों को जोड़िये--
(क) लग्नेश की राशि, अंश, कला, विकला ।
(ख) सप्तमेश की राशि, अंश, कला, बिकला ।
(ग) पंचमेश की राशि, अंश, कला, विकला ।
इनको जोड़ने से जो राशि, अंश, कला, विकला आवे वह किस
नक्षत्र के अन्तर्गत पड़ती है यह निकालिये । * इस नक्षत्र के स्वामी
को जब महादशा हो और निम्नलिखित में से किमी की अन्तर्दशा
हो तो पुत्रोत्पत्ति होती है ।
(i) पंचम भाव में जो ग्रह हो ।
(ii) जो ग्रह पंचम को देखता हो ।
(iii) पंचमेश ।
सुतपतिगुर्वोरथवा तद्युक्तराश्यंशकाधिपानां वा ।
बलसहितस्य दशायामपहारे वा सु