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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 684 में से

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पृष्ठ 239

२३८ फलदीपिका
यह देखिये कि कौन से ग्रह पांचवें घर में बैठे हैं या पांचवे घर के
स्वामी के साथ बैठे हैं और उनमें से कितने ऐसे हैं जो मित्र, नीच
और शत्रु नवांश में है। इसी प्रकार यह विचारिये कि बृहस्पति से
पंचम स्थान में कौन-कौन से ग्रह हैं--वे तथा बृहस्पति से पंचम स्थान
का स्वामी मित्र नवांश में है या नहीं। यह भी देखना चाहिये कि
सूर्य जिस नवांश में है उससे पंचम में जो ग्रह है या उससे पंचम का
जो स्वामी है यह सब मित्र नवांश में हैं या नहीं ॥१३॥
जीवेन्दुक्षितिजस्फुटैक्यभवने युग्मे च युग्मांशके
स्त्रीणां क्षेत्रबलं वदन्ति सुतदं मिश्रे प्रयासात्फलम्
भास्वच्छुक्रगुरुस्फुटैक्यभवनेप्योजांशकेऽप्योजभे
पुंसां बीजबलं सुतप्रदमिमं मिश्रे तु मिश्रं वदेत् ॥१४॥
इस श्लोक में यह बताया गया है कि किसी पुरुष की जन्मकुण्डली
देखकर यह कैसे बताना कि इस पुरुष के वीर्य में सन्तान उत्पन्न करने
की ताक़त है या नहीं और किसी स्त्री की जन्मकुण्डली देखकर यह
कैसे बताना कि इसमें सन्तान उत्पन्न करने की ताक़त है या नहीं।
पहले पुरुष की कुण्डली का विचार किया गया है।
पुरुष की कुण्डली में सूर्य-स्पष्ट, शुक्र-स्पष्ट और वृहस्पति-स्पष्ट
अर्थात् सूर्य, वृहस्पति, शुक्र इन तीनों ग्रहों की राशि, अंश, कला,
विकला जोड़ लीजिए। इनके जोड़ने पर यदि ऊनी राशि, ऊना नवांश
आवे तो समझिये कि इस पुरुष के वीर्य में पुत्र उत्पन्न करने की पूर्ण
क्षमता है। यदि राशि और नवांश इनमें से एक ऊना, एक पूरा आवे
तो मिलाजुला फल समझिये और यदि सम राशि, सम नवांश आवे तो
समझिये कि इस पुरुष में पुत्रोत्पत्ति की क्षमता नहीं है।
यदि स्त्री की कुण्डली का विचार करना हो तो उसकी कुण्डली
का चन्द्र स्पष्ट, मंगल-स्पष्ट और बृहस्पति-स्पष्ट (अर्थात् इन