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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 237

२३६ फलदीपिका
सुतस्य नाशः कथितोऽत्र तज्ज्ञैः
शुभैरदृष्टे सुतभे सुतेशे ॥६॥
यदि पांचवें घर का मालिक नीच राशि में हो, शत्रु राशि में हो,
या अस्त हो, या षष्ठेश, व्ययेश अथवा अष्टमेश के साथ हो तो सन्तान
नष्ट होती है। किन्तु यदि पंचमेश और पंचमभाव को शुभ-ग्रह देखें
तो सन्तान नष्ट नहीं होगी ॥९॥
सुतनाथजीवकुजभास्करेषु वै
पुरुषांशकेषु च गतेषु कुत्रचित् ।
मुनयो वदन्ति बहुपुत्रतां सदा
सुतनाथवीर्यवशतः सुपुत्रताम् ॥१०॥
यदि पांचवे घर का स्वामी, बृहस्पति, मंगल और सूर्य यह चाहे
कहीं भी हों किन्तु पुरुष नवांश में हो तो मुनियों का मत हैं कि ऐसे
व्यक्ति के बहुत पुत्र होते हैं। यदि पंचमेश बली होगा तो सुपुत्र होंगे;
यदि पंचमेश निर्बल होगा तो कुपुत्र होंगे। * ॥१०॥
पुंराश्यंशेऽधीशवरे पुंग्रहेन्द्रै-
र्युक्ते दृष्टे पुंग्रहे पुंप्रसूतिः ।
स्त्रीराश्यंशे स्त्रीग्रहैर्युक्तदृष्टे
स्त्रीणां जन्म स्यात्सुतर्क्षे सुतेशे ॥११॥
किसी व्यक्ति के कन्या विशेष होंगी या पुत्र विशेष इसका सिद्धांत
इस श्लोक में बताया गया है। यदि पंचम भाव पुरुष राशि, पुरुष अंश
** मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुम्भ पुरुष राशि या पुरुष
नवांश कहलाते हैं। वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर तथा मीन
स्त्रीराशि या स्त्री नवांश हैं।