फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
पृष्ठ 210, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ेंहोते हैं। मूल श्लोक में शब्द आया है कि वह वक्र (टेढ़ा) भी होता
है। यहां हम वक्र का कुटिल अर्थ करें तो विशेष उपयुक्त होगा। ॥४॥
यदि जातक का सिंह लग्न हो या सिंह राशि में चन्द्रमा हो तो
जातक का स्वरूप निम्नलिखित होता है :-
पीले नेत्र, मोटी ठोढ़ी, बड़ा चेहरा। ऐसे व्यक्ति अभिमानी,
पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं।
ऐसे जातक वनों में और पहाड़ों में भ्रमण करने के शौकीन होते हैं।
सिंह लग्न या सिंह राशि वाले जातक छोटी-सी बात पर, जिस में
क्रोध नहीं करना चाहिये उसमें भी, क्रोध करते हैं। ॥ ५ ॥
यदि जन्म के समय कन्या लग्न हो या चन्द्रमा कन्या राशि में हो
तो जातक सत्य में रत (सत्य का पालन करने वाला), प्रिय वचन
बोलने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के नेत्रों में लज्जा रहती है,और
सुरत प्रिय होता है। कन्या लग्न या राशि के जातक शास्त्रों को
जानने वाले (विद्वान्) होते हैं। दूसरे के द्रव्य और दूसरों के मकान का
लाभ उठाते हैं। इनके कन्धे और बाहु ढीले होते हैं और पुत्र सन्तति
भी थोड़ी होती है। ॥ ६ ॥
यदि तुला लग्न हो या तुला राशि का चन्द्रमा हो तो देवताओं और
ब्राह्मणों का भक्त किन्तु चंचल और कृश शरीर वाला होता है। ऐसा
व्यक्ति लम्बा, खरीद फरोख्त में होशियार, धैर्यवान्, इन्साफ़ पसन्द होता
(ऐसे आदमी को अन्य लोग पंच मुकर्रर करते हैं)। तुला लग्न या
तुला राशि के जातकों के प्रायः दो नाम होते हैं। सन्तान थोड़ी होती
है, और जातक घूमने का शौकीन होता है। ऐसे व्यक्तियों का भाग्योदय
विलम्ब से होता है।
यदि जन्म के समय वृश्चिक लग्न हो या चन्द्रमा वृश्चिक राशि
में हो तो छाती और नेत्र विशाल होते हैं। जांघ और पिडलियाँ गोल
होती हैं। हाथ पैर में पद्म रेखा होती है। ऐसे जातक बचपन में
बीमार रहते हैं और उन्हें पिता तथा गुरु का सुख पूर्ण नहीं होता।
ऐसे व्यक्ति क्रूर क्रिया करने वाले और राजकुल में बहुत ऊँची पदवी