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सर्वकोश
पाटीगणित (श्रीधराचार्य - प्राचीन संस्कृत टीका एवं प्रो. कृपाशंकर शुक्ल सविस्तार व्याख्या)

पाटीगणित (श्रीधराचार्य - प्राचीन संस्कृत टीका एवं प्रो. कृपाशंकर शुक्ल सविस्तार व्याख्या)

Patiganita of Sridharacharya with Commentary

श्रीधराचार्य (सम्पादक: प्रो. कृपाशंकर शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished337 पृष्ठ

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शुद्धिपत्रम्
पृष्ठ | पङ्क्ति | अशुद्ध | शुद्ध
२१ | १३ | ॰द्वयम् | ॰त्रयम्
३६ | २३ | ३/२ २̇/१̇/७̇/४̇ | ३/२ | ३/२ | ३/२ | | ३/२ २̇/१̇/७̇/४̇ | ३/२ | ३/२ | ३/२ + |
३६ | २५ | १९५/३०१ | १९५/३०१
३६ | २६ | चतुर्भिः कुडवैः प्रस्थ इति चतुर्गुणिते भाज्ये ३७०/३०१ | चतुर्भिः प्रस्थैः आढक इति चतुर्गुणिते भाज्ये ७८०/३०१ । लब्धं प्रस्थौ २ प्रस्थशेषम् १७८/३०१ प्रस्थाभावात् कुडवा लब्धव्याः । चतुर्भिः कुडवैः प्रस्थ इति चतुर्गुणिते भाज्ये ७१२/३०१
३६ | २७ | १७८/३०१ | ११०/३०१
४२ | १७ | ॰च्छेददाव्यय॰ | ॰च्छेदाव्यय॰
४८ | १ | १ ६/३ २/२/५ |