परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
सर्वसाधारणक्रमः २७३
रचनाकालः -
अग्निबाणाद्रिभूसंख्ये शाके तपसि गीष्पतेः।
वासरे शुक्लपक्षस्य दिन आद्ये निशामुखे।।
अर्पितः श्रीकालिकायामनेन प्रीयतां शिवा।।
।। इति श्रीपण्डितकुलावतंसनिखिलनित्यनैमित्तिकानुष्ठानपुष्टीकृतकलशो-
द्भवाद्युपासकवर्य्यामृतेशानन्दनाथप्रेमपात्रसुब्रह्मण्यतनूद्भवश्रीरामेश्वरविरचिता
सौभाग्योदयसंज्ञिका परशुरामकल्पसूत्र(मुख्यांश)वृत्तिः परिपूर्णा।।
।। इति शिवम्।।
।। श्रीरामेश्वरकृत मुख्यांश-सौभाग्योदयवृत्तिसहित
डॉ. परमहंसमिश्रकृत नीर-क्षीर-विवेक भाषा-भाष्य-समन्वित
श्रीपरशुरामकल्पसूत्र का सर्वसाधारणक्रम नामक दशम खण्ड परिपूर्ण ।।१०।।
।। शुभं भूयात् ।।
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CC.0 Digitized by Arya Samaj Foundation, Chennai and eGangotri
Vidya Niwas Mishra Collection, Varanasi. Courtesy. Dayanidhi Mishra ji
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