पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 8, कुल 170 में से
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युगे युगे तु सामर्थ्यं शेषं मुनिविभाषितम् ।
पराशरेण चाप्युक्तं प्रायश्चित्तं विधीयते ॥
( पारा०, श्लो० ३४, अ० १ )
कृते सम्भाषणादेव त्रेतायां स्पर्शनेन च ।
द्वापरे त्वन्नमादाय कलौ पतति कर्मणा ॥
( पारा०, श्लो० २६, अ० १ )
इसमें मूल पाठ की शुद्धता प्राचीन हस्तलिखित प्रतियों के आधार पर की
गयी है । स्थान-स्थान पर पाठान्तर भी दिया गया है । मूलानुगामी सरल,
सुललित एवं परिमार्जित हिन्दी टीका लिखी गयी है । इसमें विषयानुक्रमणिका
तथा श्लोकानुक्रमणिका भी दी गयी है जिससे इसकी उपयोगिता और भी अधिक
बढ़ गयी है ।
अब तक पाराशर स्मृति का ऐसा सर्वोत्तम संस्करण कहीं से प्रकाशित है यह
देखने में नहीं आया ।
इसकी सर्वोत्तम छपाई-सफाई एवं शुद्ध मुद्रण के लिए ठाकुरप्रसाद ऐण्ड
सन्स के अधिकारी वर्ग धन्यवाद के पात्र हैं ।
इसके सम्पादन में बन्धुवर पं० हीरालालजी मिश्र, व्याकरणाचार्य से मुझे
विशेष सहायता मिली है, इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ । इसका उद्घोषवचन
जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीमद्देश्वरानन्दजी सरस्वती महाराज ने लिखने
का कष्ट किया है, एतदर्थ उनका मैं हृदय से आभारी हूँ ।
यद्यपि इसके संशोधन-सम्पादन तथा हिन्दी व्याख्या का कार्य भी मैंने बड़ी
सावधानी के साथ किया है, फिर भी मानव-दोष से सम्भव त्रुटियों के लिए
‘शूर्पवद् दोषमुत्सृज्य गुणान् गृह्णन्ति साधवः’ के अनुसार क्षमा-प्रार्थी हूँ ।
निर्जला एकादशी
सी० के० ५।२६ ए०, भिखारी दास, } -शिवदत्त मिश्र शास्त्री
वाराणसी-१