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पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पण्डित विष्णु शर्मा द्वारा

स्रोत: पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र) · श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम प्रेस, बम्बई · 1910 (उद्गम)

DevanagariHindipublished536 पृष्ठ

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॥ श्रीः ॥
अथ पंचतन्त्रम् ।
भाषाटीकासहितम् ।
─-०-०-०-०-─
ब्रह्मा रुद्रः कुमारो हरिवरुणयमा वह्निरिन्द्रः कुबेर-
श्चन्द्रादित्यौ सरस्वत्युदधियुगनगा वायुरुर्वी भुजङ्गाः।
सिद्धानद्योऽश्विनौ श्रीर्दितिरदितिसुता मातरश्चण्डिकाद्या
वेदास्तीर्थानि यज्ञा गणवसुमुनयः पान्तु नित्यं ग्रहाश्च॥१॥
मया ज्वालाप्रसादेन नमस्कृत्य गजाननम् ।
क्रियते पञ्चतंत्रस्य भाषाटीका मनोरमा ॥
दोहा-शंभु शिवा रघुपति सिया, बन्दौं पवनकुमार ।
कृपा करहु जन जान मोहिँ, गुणागार सुखसार ॥
ब्रह्मा, शिव, कार्तिकेय, विष्णु, वरुण, यम, अग्नि, इन्द्र, कुबेर, चन्द्र, सूर्य्य,
सरस्वती, सागर, चारोंयुग, पर्वत, वायु, पृथ्वी, वासुकि आदि सर्प, कपिलादि
सिद्ध, नदी, अश्विनीकुमार, लक्ष्मी, दिति ( कश्यपपत्नी ), आदितिके पुत्र
( देवता ), चण्डिकाआदि मातायें, वेद ( ऋक्, यजु, साम, अथर्व ), तीर्थ
( पुण्यक्षेत्र काशी आदि ), यज्ञ ( दर्श पौर्णमासादि ), गण ( प्रमथादि ), वसु
( आठ देव ), मुनि ( व्यासादि ), ग्रह ( सूर्यादि ), नित्य ( हमारी ) रक्षा
करें । स्रग्धरा छन्द है ॥ १ ॥
मनवे वाचस्पतये शुक्राय पराशराय ससुताय ।
चाणक्याय च विदुषे नमोऽस्तु नयशास्त्रकर्तृभ्यः ॥२॥
स्वायम्भू मनु, वृहस्पति, शुक्र, सपुत्र ( व्याससहित ) पराशर, पण्डित
चाणक्य और नीतिशास्त्रके बनानेवालोके निमित्त नमस्कार है ॥ २ ॥