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सर्वकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 609, कुल 726 में से

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पृष्ठ 609

[Page Header: पंचकोशविवेक का संक्षेप २१]

बैठ जायगी कि इस ईश्वरभाव और जीवभाव का जन्म तभी होता
है जब हम शक्तियों और कोशों की ओर को ध्यान दे बैठते हैं,
यदि हम इन दोनों की ओर को ध्यान बँटाना ही छोड़ दें तो
फिर ब्रह्मभाव ही शेष रह जाता है। ऐसा ज्ञान पाते ही साधक
लोग पूर्ण रूप से ब्रह्म हो जाते हैं। अपनी उपाधियों को तोड़
फोड़कर अपने व्यापक रूप को कमा लेते हैं। वेदान्तसम्प्रदाय
में बताये हुए चारों साधनों से युक्त जो अधिकारी लोग उपर्युक्त
प्रकार से पांचों कोशों का विवेक करके, उस गुहाहित ब्रह्म का
साक्षात्कार कर लेते हैं तो यह बात बेझिझक कही जा सकती
है कि वे तो ब्रह्म तत्त्व ही होगये हैं। 'न जायते म्रियते वा
विपश्चित्' ऐसे ज्ञानी पुरुष का फिर मरना जीना छूट जाता है।
क्योंकि ब्रह्म का तो जन्म ही नहीं होता है। उसने तो विवेक
के द्वारा अपने अमर ब्रह्मभाव को जगा लिया है।