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सर्वकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 537, कुल 726 में से

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पृष्ठ 537

[Header] ब्रह्मानन्दे अद्वैतानन्दप्रकरणम् ५१५
नहीं है)। [इन घटादि कार्यों का आधार बनी हुई] स्पर्श आदि
गुणवाली केवल मिट्टी ही सत्य पदार्थ है।
व्यक्ताव्यक्ते तदाधार इति त्रिष्वाद्ययोर्द्वयोः।
पर्यायः कालभेदेन, तृतीयस्त्वनुगच्छति ॥४०॥
'व्यक्त', 'अव्यक्त' तथा 'इन दोनों का आधार' ये तीन ही
पदार्थ हैं। [घट आदि कार्य व्यक्त कहाते हैं। इन कार्यों की
कारण शक्ति अव्यक्त कही जाती है। कार्य और शक्ति इन दोनों
का 'आधार' मिट्टी होती है]। इन तीनों में पहले दोनों [कार्य
तथा शक्ति] का कालभेद से पर्याय [क्रम] रहता है। [कभी
कार्य होता है और कभी शक्ति रहती है। शक्ति और कार्य ये
दोनों ही कादाचित्क हैं। इसी से ये मिथ्या या अनृत कहे जाते
हैं]। किन्तु इन दोनों का आधार तीसरा पदार्थ जो मिट्टी आदि
है वह तो दोनों में ही अनुगत रहता है [वह मिट्टी कार्यावस्था
में भी रहती है और शक्ति काल में भी बनी रहती है। यों
त्रिकालस्थायी होने से वही सत्य तत्व है]।
निस्तत्त्वं भासमानं च व्यक्तमुत्पत्तिनाशभाक्।
तदुक्तौ तस्य नाम वाचा निष्पाद्यते नृभिः ॥४१॥
व्यक्त कहाने वाले घटादि पदार्थ यद्यपि निस्तत्व [अर्थात्
स्वरूप से असत्] हैं तो भी भासा करते हैं। इनके उत्पत्ति
और विनाश भी रहते हैं। जब ये उत्पन्न हो जाते हैं तब मनुष्य
शब्दों में इनका नाम रख लेते हैं। [इन्हीं सब कारणों से इन
विकारों (कार्यों) को 'असत्य' कहा जाता है।]
व्यक्ते नष्टेऽपि नामैतन्नृवक्त्रेष्वनुवर्तते।
तेन नाम्ना निरूप्यत्वाद् व्यक्तं तद्रूपमुच्यते ॥४२॥