पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
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पञ्चदशी
तत्त्वविवेकप्रकरणम्
नमः श्रीशंकरानन्दगुरुपादाम्बुजन्मने ।
सविलासमहामोहग्राहग्रासैककर्मणे ॥ १ ॥
विलास [अर्थात् अपने कार्य] सहित जो महामोह [किंवा
मूलाज्ञान] रूपी महादुःखदायी ग्राह है, उस को ग्रस लेना ही
जिस चरण-कमल का एक मुख्य काम है, श्री शंकरानन्द
नाम के गुरुदेव के उस चरण-कमल को हमारा प्रणाम हो—
अर्थात् हम अपने आप को गुरुदेव के चरणों में अभेद भाव से
अर्पण किये देते हैं ।
तत्पादाम्बुरुहद्वन्द्वसेवनिर्मलचेतसाम् ।
सुखबोधाय तत्वस्य विवेकोऽयं विधीयते ॥२॥
ऐसे गुरु के चरण-कमलों की सेवा से जिनका चित्त निर्मल
[रागादि शून्य] हो चुका हो, उनको सुखबोध [सरलता से तत्व-
ज्ञान] कराने के लिए, अब तत्व [अनारोपित किंवा सत्यस्वरूप]
का विवेचन किया जाता है । [पंचकोश नाम के इस आरोपित
जगत् में से अब उस अनारोपितस्वरूप अखण्ड सच्चिदानन्द
वस्तु को पृथक् करके दिखाया जाता है] ।