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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

˙पद्मावत˙ 14653 ३१३
नागमती यह दुनियां धन्धा । बांचा सोई न यह चित बन्धा ॥
राघव दूत सोई शैतानू । माया अलाउदीं सुलतानू ॥
प्रेम कंथा यह भांति विचारू । बूझलेहु जो बूझेंहि पारू ॥
दो० तुरकी अरबी हिन्दवी, भाषाँ जेती आहि ।
जामें मारग प्रेमका, सबै सराहें ताहि ॥
मुहम्मद कवि यह जोर सुनावा । सुना सो प्रेम पीर का पावा ॥
जोरे लायै रक्त लेगये । प्रेमप्रीति नयनहिं जल भये ॥
औ मैं जान गीत अस कीन्हा । कीय हरीति जगत मँह चीन्हा ॥
कहां सो रतनसेन अब राजा । कहां सुवा अस बुधै उपराजा ॥
कहां अलाउदीन सुलतानू । कहँ राघव जेहि कीन्ह बखानू ॥
कहँ स्वरूप पद्मावत रानी । कुछ न रही जग रही कहानी ॥
धनसोई यशँ कीरति तासू । फूल मरै पै मरै न बासू ॥
दो० कैन जगत यशँ बेचा, कैन लीन यशँ मोल ।
जो यह पढ़ै कहानी, हम सँवरै दोइ बोलें ॥
मुहम्मद वृद्धैं बैश जो भई । यौवनैं हत सो अवस्थौ गई ॥
बल जो गयो कैक्षीऐं शरीरू । दृष्टि १६ गई नयनहिं दै नीरू ॥
दर्शनै गये कै बचा कपोलौँ । बैनैं गये अनरुच दैबोला ॥
बुधि २१ जोगई दै हियैँ बौराई । गर्व २२ गयो तरिहत शिरनाई ॥
श्रवणैं गये ऊँच जो सुना । स्याही गये शीशँ भा धुना ॥
भँवर गये केशँहि दे भुवा । यौवनैं गयो जीत लै जुवा ॥
बूझसको १ बोली २ खून जिगर पीकर ३ दुनियां में निशानी ४ अक्ल
बताई ५ तारीफ ६ नेकनामी ७-६-१० करनी ८ दुआयखैर ११ बूढ़ी उमर १२
जवानी १३-२७ उमर १४ दुबला बदन १५ निगाह १६ पानी १७ दांत १८ गाल
१६ आवाज़ २० अक्ल २१ दिल २२ ग़रूर २३ कान २४ शिर २५ बाल २६ ॥

३१४ पद्मावत ।
जोलहि जीवन यौवन साथा । पुनि सो मीचें पराये हाथा ॥
दो० वृद्धि२ जो शीशँ डुलावै, शीशधुनहि तेहि रीसैं ।
बूढ़ी आयू होहु तुम; कै यह दीन अशीस ॥
मौत १ बूढ़ा २ शिर ३ गुस्सा ४ उमर ५ ॥
इति श्रीपद्मावतभाषा मलिकमुहम्मदजायसीकृत समाप्त ॥

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निम्नलिखित नवलकिशोर प्रेस की पुस्तकें
अवश्य देखियेः—


नाम किताब की० | नाम किताब की०

अचम्भे का बच्चा .... -) | बैतालपचीसी .... I)॥
अलीबाबा और चा- | बैतालपचीसी पद्य .... I)I
लीस चोर .... =) | मनोहर कहानी .... =)॥
कथा सरित्सागर भाषा ३) | मर्द औरत का किस्सा =)
किस्सा सारंगा सदाबृक्ष -)॥ | मसनवी मीर हसन =)॥
घराज घटना .... I) | राजाभोज का स्वप्न -)
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दास्तान अमीरहमज़ा २॥I) | विचित्र चरित्र .... २॥I)
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तोता मैना आठोंभाग I॥-) | शाहनामा .... II)॥
दिल्लगी का पिटारा.... -)III | शुकबहत्तरी .... .... =)
फ़साना अजायब .... I)॥ | सहस्ररजनीचरित्र .... ३॥I)
बकावलीसुमन .... =) | साढ़ेतीन यार का
बचनतरंगिणी .... =) | अपूर्व किस्सा .... I)
विक्रमविलास .... -)॥ | सिंहासन बत्तीसी .... I)॥
विरहवारीश माधवा- | सूरजपुर की कहानी =)
नल कामकंदला | हंसजवाहिर भाषा .... II)॥
चरित्र .... .... I=) | हातिमताई का किस्सा II)

मिलने का पताः —
मुंशी विष्णुनारायण भार्गव,
मालिक नवलकिशोर प्रेस, लखनऊ.

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