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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

२६ पद्मावत ।
कंचनबरनं सुआ अतिलोनां । मानोमिला सुहागहि सोना ॥
दो० रहहिं एक सँग दोऊ, पढ़ें शास्त्र औ वेद ।
पढ़ना शीशँ डुलावहीं, सुनत लाग तस भेद ॥
भई अनन्त पद्मावति बारी । रचिरचि विधि सबकला सँवारी॥
जगँ बेधा तेहि अंगसुवासा । भँवर आय लुब्धे चहुँपासा ॥
बेनी नाग मलयगिरि पीठी । शशि माथे होय दूजपैठी ॥
भौहैं धनुष साधि शर फेरे । नयनें कुरंग भूल जनुहेरे ॥
नासिकँ कीर कमेलमुखसोहा । पद्मिनिरूपदेखिजगे मोहा ॥
माणिक अधरैं दर्शन जनु हीरा । हियहुलसै कुच कनकँ जँभीरा ॥
केहरि लंकै गवनु गजँ हरी । सुरनर देखि माथ भुइँधरी ॥
दो० जगँ कोउदृष्टि न आवै, अपसरनै होय अकास ।
योगी यती संन्यासी, तप साधहिं तेहि आश ॥
राजैं सुना दृष्टि भइआना । बुद्धि जो देसँग सुआँ सयाना ॥
भयो रजायँसु मारहिं सुऔं । सबरे सुना चाँद जहँ उआ ॥
शत्रु सुऔं के नाऊ बारी । सुनि धाये जस धाय मँजारी ॥
तब लग रानी सुऔं छिपावा । जवलग आवमँजारि नपावा ॥
पिताँ कि आयसु माथे मोरे । कहोजाय बिनवैं करंजोरे ॥
पंखन कोई होय सुजानू । जाने भुक्ति कि जानि उड़ानू ॥
सुऔं जो पढ़े पढ़ाये बयनौँ । तेहि कतवध जेहिहिये ननयनौँ ॥
सोनेका रंग १ खूबसूरत २ शिर ३ ब्रह्मा ४ दुनिया ५-२४ गूंजना ६ चोटी
७ चन्दन ८ चाँद ६ तीर १० आँख ११-४६ हरिण १२ नाक १३ तोता १४-२६-
२१-३३-३५-४३ संसार १५ मूंगा १६ होंठ १७ दाँत १८ खुशहोनो १६ छाती
२० सोना २१ चीताकी कमर २२ चालहाथी और सिंह की तरह २३ निगाह
२५-२७ इन्द्रलोककी परी २६ अक़्ल २८ हुक्म ३०-३८ दुश्मन ३२ बिल्ली
३४-३६ बाप ३७ अरज़ करना ३६ हाथ जोड़ना ४० अक़्लमन्द ४१ खाना ४२
बोली ४४ मारना ४५ ॥