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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 25

२४ पद्मावत ।
[जन्म खण्ड]
चम्पावत जो रूप मनमाहां। पद्मावतिकी ज्योति कि छांहां ॥
भइ चाहै असकथा जो होनी । मेटिनजाय लिखी जसहोनी ॥
सिंहलद्वीप भयो तबनाऊँ । जो असदिया बरा तेहिठाँऊँ ॥
प्रथमँ सो ज्योतिगगनै निर्मई। पुनि सुपितासाथे मनभई ॥
पुनिवह ज्योतिमातघटें आई। तिनहिं उदरें आदर बहुपाई ॥
जस अवधानै पूरहै मासूं । दिनदिन हिये होयपरकासूँ ॥
जस अंचल महँ छिपयेदिया । तम उजियार दिखावै हियाँ ॥
दो० सोने मंदिर सँवारा, औ चन्दन सब लीप।
दियाजोमनशिवलोक महँ, उपर्जा सिंहलद्वीप ॥
भै दशमास पूरि भइ घरी । पद्मावति कन्या अवंतरी ॥
जानो सूर्य किरण हतगाढ़ी । सूरज किरण घाट वह बाढ़ी ॥
भानिशि महँदिनकरपरकाँसू । सब उजियार भयो कैलासू ॥
इतनी रूप मूर्ति परगँटी । पून्यो शँशि सुखीनँ द्वैघटी ॥
घटतहिं घटत अमावस भये । दिनदुइ लाज गाडभुइँ गये ॥
पुनि जो उठी दुइज है उये। शशिनिकलंकविधिहि निरमये॥
पद्मगन्ध बेधा जग बासा । भँवर पतंग भ्रमै चहुँपासा ॥
दो० इतनी रूपभई कन्या, जेहि स्वरूप नहिं कोय ।
धन सुदेश रूपवन्ता, जहां जन्म अस होय ॥
भई छठिरात छठी सुखमानी । रहस कूदसो रयन बिहानी ॥
भा बिहान पण्डित सब आये। काढ़ि पुराण जन्म अरथाये॥
उत्तर्म घड़ी जन्म भा तामू । चांदउआ भुइँ दिपा अकासू ॥
जगह १ पहिले २ आसमान ३ पेट ४-५ हमल ६ रोशनी ७ दिल ८ पैदा
होना ६-१० राति ११ उजियारा १२ ज़ाहिर होना १३ पूर्णमासीका चांद १४
पतला १५ ब्रह्मा १६ कमलकी खुशबू १७ रात्रि १८ अच्छी १९ ॥