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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 22

पद्मावत। २१
मूले^१ पतार स्वर्ग^२ वहशाखा। अमरबेलिको पावको चाखा॥
चन्द्रपातै^३ औ फूल तरोंईं। होयउजियार नगर जहँताईं॥
वैफल पावै तप करि कोई। बृद्धखाय नवयौवनै^४ होई॥
दो० राजा भये भिखारी सुनि वह अमृत भोग।
जेपावा सो अमर भा, न कुछ व्याधि नहिं रोग॥
गढ़ै^६ पर बसहिं चारै^७ गढ़पती^८। अश्वपँगजंपमुवपं^९ नरंपैती^१०॥
सबकधौरहरे^११ सोने साजा। औ अपने अपने घर राजा॥
रूपवन्ते^१२ धनवन्ते^१३ सभोगी। परसैंपषाणपवँरै^१५ तेहिलागी॥
भोग परसैं सदा सबमाना। दुख चिन्ता कोई नहिं जाना॥
मँदिर मँदिर सबके चौपारी। बैठि कुँवर सबखेलहिं सोरी॥
पांसा ढरहिं खेल भल होई। स्वर्ग वान सरपूंजनं कोई॥
भाटबरन केहिं कीरति^२२ भली। पावहिं हस्तिं^२३ घोड़ सिंहली॥
दो० मँदिर मँदिर सबकी फुलवारी, चोवा चन्दन बास।
निशि^२४ दिनरहै वसन्तवहँ, छहऋतुबारहमास॥
पुनि चलि देखा राजदुवारा। मानुषफिरहिं पायनहिंबारों॥
हस्तिं सिंहली बांधे बारैं^२४। जनुसजीव^२५ सबठाढ़ पहारा॥
कवन्योश्वेतै^२८ पीतैं रतनौरे। कवन्योहरे धूमैं असकारे॥
बरनेंबरन गगनैं^३३ जसमेघा। उठहिं गगनैं^३५ बैठिजनुठेघाँ॥
सिंहल के बरने^३७ सिंहले। इकइक चाहसो इकइकबले॥
जड़ १ आसमान २ पत्ता ३ नखत ४ नवजवान ५ हमेशा ६ क़िला ७
घोड़ेका सवार ८ हाथीका सवार ९ ज़मीनका मालिक १० राजा ११ महल १२
खूबसूरत १३ दौलतमन्द १४ नसीबवर १५ पारस पत्थर १६ दरवाज़ा
१७-२७ हँसीखुशी १८ चौसर १९ बराबरी २० तारीफ़ २१ नेकनामी २२
हाथी २३-२६ रात्रि २४ दखल २५ जानदार २८ सफ़ेद २९ ज़र्द ३० लाल ३१
धुंवां ३२ रंगबैरंग ३३ आसमान ३४-३५ पहाड़ ३६ बयान करना ३७॥