नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 89, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंहो। इसके अतिरिक्त दस्तावेज़ साक्षियों द्वारा समर्थित और सरकारी अधिकारी द्वारा
सत्यापित होना चाहिए। उपर्युक्त सभी कुछ न लिये रहने वाला दस्तावेज़ पूर्णतः
विशुद्ध न होने से प्रामाणिक नहीं कहलाता। शुद्ध दस्तावेज़ होने पर ही सम्पत्ति का
स्वामित्व वैध बन पाता है।
भोगं केवलतो यस्य कीर्त्तयेन्नागमः क्वचित्।
भोगच्छलापदेशेन स विज्ञेयस्तु तस्करः॥ 86 ॥
जिस सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा तो है, परन्तु क़ाबिज़ के पास उस सम्पत्ति के
ख़रीदने अथवा उपहार में पाने अथवा पैतृक होने अथवा बन्धक या धरोहर होने
आदि का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं, तो सम्पत्ति पर अपने स्वामित्व का दावा करने
वाले व्यक्ति को चोर ही समझना चाहिए।
अभिप्राय यह है कि बिना किसी पक्के, विशुद्ध और सच्चे लिखित प्रमाण के
ख़ाली क़ब्ज़े का कोई विशेष महत्त्व नहीं। यह तो एक प्रकार की चोरी अथवा
सीनाज़ोरी है, अर्थात् दण्डनीय अपराध है। ख़ाली क़ब्ज़े के आधार पर अपने को
सम्पत्ति का स्वामी सिद्ध करने वाले को तो दण्डित ही करना चाहिए।
अनागमं तु यो भुङ्क्ते बहून्यब्दशतान्यपि।
चौरदण्डेन तं पापं दण्डयेत् पृथिवीपतिः॥ 87 ॥
राजा को बिना किसी प्रमाण के, अर्थात् स्वामी न होने पर भी अपने बल,
युक्ति अथवा धूर्तता का आश्रय लेकर किसी दूसरे की सम्पत्ति पर अनुचित रूप से
अपना क़ब्ज़ा जमाने वाले को चोर के लिए निर्धारित दण्ड से दण्डित करना
चाहिए; क्योंकि वस्तुतः ऐसा व्यक्ति धूर्त और पापी होता है और उसे दण्ड देना
न्याय की रक्षा करना है।
भुज्यतेऽनागमं यत्तु न तद् भोगपदं नयेत्।
प्रेतं तु भोक्तरि धनं याति तद्वंश्यभोग्यताम्॥ 88 ॥
बिना किसी लिखित प्रमाण के किसी की सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा करने वाला
व्यक्ति तो कभी उस सम्पत्ति का स्वामी नहीं बन सकता, परन्तु उसके मर जाने पर
वह सम्पत्ति उसके उत्तराधिकारियों की ही सम्पत्ति रहती है, अर्थात् क़ब्ज़ा करने
वाले व्यक्ति के मरने पर क़ब्ज़ा निरस्त नहीं हो जाता, अपितु उसके वंशस्थों को
स्थानान्तरित हो जाता है।
स्मार्त्ते काले क्रियाभुक्तेः सागमाभुक्तिरिष्यते।
अस्मार्त्ते लिखिताभावे क्रमात्त्रिपुरुषागता॥ 89 ॥
यदि किसी सम्पत्ति पर तीन पीढ़ियों तक एक ही परिवार का क़ब्ज़ा बना
रहता है और उस अवधि में क़ब्ज़ा करने वालों के विरुद्ध कोई क़ानूनी कार्यवाही
नहीं की जाती है, तो उस सम्पत्ति पर क़ाबिज़ों का स्वामित्व हो जाता है। यदि
नारदस्मृति / 87