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सर्वकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 304 में से

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पृष्ठ 243
  1. चोरों को आश्रय देने वाले अथवा छिपने आदि में उनकी सहायता करने
    वाले।
    उत्क्रोशतां जनानां च ह्रियमाणे धने तथा।
    श्रुत्वा ये नाभिधावन्ति तेऽपि तद्दोषभागिनः॥ 20 ॥
    चोर अथवा चोरों को चोरी करते देखकर अथवा उनसे पिटे होने पर सहायता
    के लिए शोर मचाने वाले स्वामियों के करुण क्रन्दन को सुनकर भी उनकी सहायता
    के लिए दौड़कर न आने वालों- भय, उपेक्षावृत्ति अथवा किसी पुरानी शत्रुता के
    कारण मुंह मोड़ने वालों- को भी चोर समझना और दण्डित करना चाहिए।
    साहसेषु य एवोक्त स्त्रीषु दण्डो मनीषिभिः।
    स एव दण्डः स्तेयेऽपि द्रव्येषु त्रिष्वनुक्रमात्॥ 21 ॥
    जिस प्रकार सामान के मूल्य, महत्त्व और उपयोगिता आदि की दृष्टि से
    उसकी चोरी के तीन- क्षुद्र, मध्यम तथा उत्तम-स्तर बताये गये हैं और उनके तीन
    प्रकार के दण्डों का विधान किया गया है, उसी प्रकार चोरों की उपेक्षा अथवा
    सहायता करने वालों के लिए भी चोरों के स्तर के अनुरूप तीन स्तर और तीन ही
    प्रकार के दण्डों का विधान समझना चाहिए।
    गवादिषु प्रणष्टेषु द्रव्येष्वपहृतेषु वा।
    पदस्यान्वेषणं कुर्युरामूलात्तद्विदो जनाः॥ 22 ॥
    गाय, भैंस, अजा और अश्व आदि पशुओं के खो जाने पर तथा दीवार तोड़
    (सेंधमार) कर सामान के चोरी हो जाने पर पदचिह्नों की परख रखने में प्रवीण
    पुरुषों की सहायता से चोरों के ठिकानों पर पहुंचने और उन्हें पकड़ने का प्रयास
    करना चाहिए।
    ग्रामे व्रजे विविक्ते वा यत्र सन्निपतेत् पदम्।
    वोढव्यं तद् भवेत्तेन न चेत् सोऽन्यत्र तन्नयेत्॥ 23 ॥
    जिस गांव, गोशाला अथवा शून्य स्थल में आये चोरों के पदचिह्न तो मिलते
    हों और बाहर निकलते न दीखते हों, वहां न केवल चोरों को छिपा हुआ समझना
    चाहिए, अपितु उन स्थानों के वासियों को भी चोरों से मिला हुआ समझना चाहिए
    और दण्डित करना चाहिए।
    पदे प्रमूढे भग्ने वा विषमत्वाज्जनान्तिके।
    यस्त्वासनतरो ग्रामो व्रजो वा तत्र पातयेत्॥ 24 ॥
    चोरों के पैरों के चिह्नों के स्पष्ट दृष्टिगोचर न होने पर अथवा भूमि के ऊंचा-
    नीचा होने से पैरों के चिह्नों के टूट-फूट जाने पर, चोरों को समीपवर्ती ग्राम में
    अथवा पशुओं के चरागाह के आस पास छिपा हुआ समझना चाहिए और उनकी
    वहीं पर खोज करनी चाहिए।
    नारदस्मृति / 241