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सर्वकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 304 में से

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पृष्ठ 196

गावस्तु गोभिन्ना देया धान्यं तत् कर्षिकस्य तु।
एवं हि विनयः प्रोक्तो गोपैः सस्यावपातनात् ॥ ३९ ॥
वस्तुतः पशुओं के स्वामियों को उनके पशु लौटाना और दूसरों के खेतों में
घुसने वाले पशुओं द्वारा उत्पात मचाने की क्षतिपूर्ति करना गोपालक का ही कर्तव्य
और दण्ड है।
ग्रामोपान्ते च यत् क्षेत्रं विवीतान्ते महापथे।
अनावृते चेत्तन्नाशे न पालस्य व्यतिक्रमः ॥ ४० ॥
गांव के आस-पास अथवा समीप के खेतों, बगीचों से सटे खेतों व राजमार्ग
के दोनों ओर के खेतों तथा पशुओं के चरने-घूमने के लिए निर्धारित खेतों में पशुओं
के घुस जाने तथा उपज को खाने-रौंदने के लिए गोपालक को अपराधी नहीं
ठहराया जा सकता।
पथि क्षेत्रे वृत्तिः कार्या यामुष्ट्रो नावलोकयेत् ।
न लंघयेत् पशुर्वाश्वो न भिन्द्याद्यं च सूकरः ॥ ४१ ॥
राजमार्ग के दोनों ओर पड़ने वाले क्षेत्रों के स्वामियों को अपने खेत के चारों
ओर ऊंची दीवार खड़ी करनी चाहिए, ताकि ऊंट, गाय, बैल और अश्व आदि पशु
उधर की उपज को देख ही न सकें। इसके अतिरिक्त उसे अपने खेत के चारों ओर
मुदृढ़, बाड़-कांटेदार तार आदि लगानी चाहिए, ताकि पशु खेत में घुस ही न सकें।
गृहक्षेत्रं च दृष्टे द्वे वासहेतू कुटुम्बिनाम् ।
तस्मात्तं नोत्क्षिपेद्राजा तद्विमूलं कुटुम्बिनाम् ॥ ४२ ॥
परिवार वाले गृहस्थों के लिए गृह और क्षेत्र दो ऐसे आवश्यक संसाधन हैं
जिनके बिना जीवन चल ही नहीं सकता। निवास के लिए सुविधाजनक स्थान गृह
है और आजीविका को चलाने का साधन क्षेत्र है। एक विश्राम का आधार है, तो
दूसरा श्रम का। अतः राजा को इन दोनों को कभी नहीं छीनना चाहिए। इन दोनों में
से किसी एक का भी छीना जाना असन्तोषजन्य विद्रोह का कारण बन सकता है।
वृद्धे जनपदे राज्ञो धर्मः कोशश्च वर्धते।
हीयते हीयमाने च वृद्धिहेतुमतः श्रयेत् ॥ ४३ ॥
वस्तुतः जनपद और जनता की सम्पन्नता-विपन्नता में ही राजा की सम्पन्नता-
विपन्नता निहित है। अभाव-पीड़ित जनता पर शासन करने वाला राजा कभी सुख
और शान्ति का जीवन व्यतीत नहीं कर सकता। अतः राजा को सदा प्रजा की
उन्नति और समृद्धि की कामना व चिन्ता करनी चाहिए।
॥ चतुर्थ अध्याय का एकादश प्रकरण समाप्त ॥